Success Story: तीन भाइयों ने देसी ड्रिंक को बना दिया ब्रांड, अब हैं करोड़ों की कंपनी के मालिक

Success Story: पंजाब के सौरभ मुंजाल ने अपने दो भाइयों सौरभ भुटना और निखिल डोडा के साथ मिलकर कुछ साल पहले 'लाहौरी जीरा' की शुरुआत की। यह एक हेल्‍दी देसी ड्रिंक ब्रांड है। लाहौरी जीरा की हर दिन 20 लाख बोतलें बनती हैं।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड5 Jun 2026, 05:51 AM IST
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Success Story: लाहौरी जीरा का स्वाद बिल्कुल घरों में बनने वाले पारंपरिक जीरा पेय जैसा होता है।
Success Story: लाहौरी जीरा का स्वाद बिल्कुल घरों में बनने वाले पारंपरिक जीरा पेय जैसा होता है।

Success Story: जैसे-जैसे ज़्यादा लोग प्राकृतिक और सेहतमंद खाने के विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे शीतल पेय उद्योग भी बदल रहा है। ऐसी ही एक सफलता की कहानी है लाहौरी जीरा की है। किचन से निकला यह शीतल पेय जल्द ही ब्रांड बन गया। पंजाब के सौरभ मुंजाल ने अपने भाइयों सौरभ भुटना और निखिल डोडा के साथ मिलकर "लाहौरी जीरा" नामक देसी ड्रिंक कंपनी की स्थापना की है। यह कंपनी प्रतिदिन 20 लाख बोतलें उत्पादन कर रही है और इसकी कमाई करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है।

दरअसल, लाहौरी जीरा ड्रिंक की कहानी की शुरुआत एक घर से हुई थी। निखिल डोडा ने घर पर एक जीरा ड्रिंक तैयार किया, जिसमें लाहौरी मसालों का विशिष्ट स्वाद था। यह ड्रिंक उनके परिवार और दोस्तों को खूब पसंद आई। इस ड्रिंक का स्वाद सौरभ मुंजाल और सौरभ भुटना ने भी चखा और तुरंत समझ गए कि यह एक शानदार बिजनेस आइडिया हो सकता है।

लाहौरी जीरा की ऐसे हुई स्थापना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ मुंजाल एमबीए ग्रेजुएट हैं। उन्‍होंने 2012 में अपना खुद का ट्रेड फाइनेंस बिजनेस शुरू किया था। इसके बाद सौरभ ने हेरिटेज हवेली नाम से एक हॉस्पिटैलिटी बिजनेस भी शुरू किया। फिर अपने भाइयों निखिल मुंजाल और सौरभ भुटना के साथ मिलकर 2017 में उन्‍होंने आर्चियन फूड्स की नींव रखी। यह 'लाहौरी जीरा' की पैरेंट कंपनी है।

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निखिल को एहसास हुआ कि मार्केट में नैचुरल डेजर्ट ड्रिंक की कमी है। इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने लाहौरी जीरा की शुरुआत की। लाहौरी जीरा का नाम इसके मुख्य इंग्रीडिएंट सेंधा नमक से प्रेरित है। 'लाहौरी' शब्द इसी से जुड़ा है। यह एक अनोखा बिना अल्कोहल वाला पेय है। इसे स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्‍तेमाल करके बनाया गया है।

लाहौरी नाम क्यों पड़ा?

कंपनी के CEO सौरभ मुंजाल बताते हैं कि लाहौरी जीरा में कोई केमिकल नहीं होता है। इसमें वे चीजें शामिल हैं, जो आपकी रसोई में आसानी से मिल जाती हैं। सौरभ ने बताया कि लाहौरी जीरा इसलिए नाम रखा, क्योंकि इसमें लाहौरी नमक (सेंधा नमक) का इस्तेमाल किया गया है।

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कंपनी के जितने भी प्रोडक्ट्स हैं, सभी में लाहौरी नमक क इस्तेमाल किया गया है। लाहौरी जीरा का स्वाद बिल्कुल घरों में बनने वाले पारंपरिक जीरा पेय जैसा होता है। कंपनी की कामयाबी का यही सबसे बड़ा राज है, और बिना बड़े विज्ञापन और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का ये ब्रॉन्ड घर-घर में पॉपुलर हो गया है।

करोड़ों में पहुंच गया टर्नओवर

कंपनी के पास 500 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर का नेटवर्क है। कंपनी ने अपने उत्पादों की रेंज का विस्तार किया है। अब जीरा के अलावा यह नींबू, कच्चा आम, शिकंजी और इमली के स्वादों में भी उपलब्ध है। मौजूदा समय में कंपनी रोजाना 20 लाख से अधिक बोतलें बनाती है। लाहौरी जीरा ने 2021 में 80 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल किया था, जो 2022 में बढ़कर 250 करोड़ रुपये हो गया। टारगेट इस रेवेन्‍यू को बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।

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