Success Story: पहाड़ों में मीना चंदेल ने शुरू की फूलों की खेती, सालाना 70 लाख का है कारोबार

Success Story: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर की मीना चंदेल टीचिंग की जॉब कर रहीं थीं। इसके बाद अपनी जॉब छोड़कर पति के साथ फूलों की खेती शुरू कर दी है। आज इससे मीना सालाना 70 लाख रुपये की कमाई कर रही हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड20 Dec 2025, 06:25 AM IST
Success Story: मीना की मेहनत को देखते हुए ‘इनोवेटिव फार्मर अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है।
Success Story: मीना की मेहनत को देखते हुए ‘इनोवेटिव फार्मर अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है।(HT)

Success Story: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर की मीना चंदेल की मेहनत से हर कोई हैरान है। कभी बच्चों का भविष्य संवार रहीं थीं। आज फूलों की खुशबू से अपनी दुनिया महका रही हैं। मीना ने अपनी करियर की शुरुआत टीचर से शुरू की थी। इसके बाद साल 2015 में अपनी टीचर की नौकरी छोड़ दी और पति के साथ मिलकर फूलों का कारोबार शुरू किया। अब मीना अपने पति के साथ मिलकर 22 बीघा जमीन पर गुलाब, कार्नेशन और जरबेरा जैसे फूल उगाती हैं। उनके पास 11,000 वर्ग मीटर का ग्रीनहाउस भी है। इस मेहनत से उन्होंने 70 लाख रुपये का सालाना टर्नओवर हासिल किया है।

मीना चंदेल को ‘इनोवेटिव फार्मर अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है। मीना चंदेल भारत की पहली महिला किसान हैं, जिन्होंने अपने ग्रीन हाउस में डायंथस फूल की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है। डायंथस एक विदेशी किस्म का फूल है, जिसे भारत में पहली बार मीना चंदेल ने अपने ग्रीन हाउस में सफलतापूर्वक उगाया और देशभर के किसानों को इस काम को करने के लिए प्रेरित किया।

मीना का बागवानी सफर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीना चंदेल ने साल 2018 में पहली बार जिप्सोफिला फूलों की खेती की शुरुआत की थी। साल 2020 में उन्होंने विदेश से जिप्सोफिला के पौधे मंगवाकर उन्हें सफलतापूर्वक उगाया और अब हिमाचल प्रदेश में हजारों किसान इन फूलों की खेती कर रहे हैं। इसके बाद, वर्ष 2021-22 में उन्होंने स्प्रे कनेक्शन की खेती भी शुरू की, जो सफल रही। मौजूदा समय में हिमाचल प्रदेश के कई किसान इन फूलों की खेती से अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं।

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मीडिया से बातचीत करते हुए मीना ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जलवायु फूलों की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। हालांकि, उनका कहना है कि हमें मार्केट की डिमांड, डेकोरेटर की पसंद और लोगों की चॉइस को ध्यान में रखते हुए फूलों की खेती करनी चाहिए। उनका हमेशा यही मानना रहा है कि नई चीजें करने की कोशिश करते हुए कई बार नुकसान भी होता है, लेकिन जितना बड़ा रिस्क होता है, प्रॉफिट भी उतना ही ज्यादा होता है।

महिलाओं के लिए मिसाल है मीना

मीना की सफलता की कहानी ने पूरे हिमाचल प्रदेश में हजारों किसानों, खासकर महिलाओं को खेती में कदम रखने के लिए प्रेरित किया है। उनका फार्म अब कृषि छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्र बन गया है। इस प्रेरणा को और आगे बढ़ाने के लिए मीना और उनके पति ने 'वाटिका फ्लोरीकल्चर सोसाइटी' नाम की सहकारी समिति की स्थापना की है।

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यह नए किसानों को खेती, फसल प्रबंधन और बाजार तक पहुंच के बारे में मार्गदर्शन करती है। उनके योगदान को कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिले हैं। मीना अब ग्लोबल फार्मर बिजनेस नेटवर्क (GFBN) का हिस्सा बनकर और भी अधिक किसानों को सलाह दे रही हैं। यह साबित करते हुए कि सही समर्थन और समर्पण के साथ खेती समृद्धि का मार्ग बन सकती है।

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