गांव की छोरी ने शहर में मचाया धमाल, खड़ा कर दिया 50 लाख का साम्राज्य

Success Story: नेहा मुजावदिया ने अपने गांव में रहकर कक्षा 8 तक हिंदी माध्यम से पढ़ाई की। इसके बाद इंदौर से MBA किया। यहीं से उन्हें एक नया आइडिया मिला और फिर ट्यूटरकैबिन (TutorCabin) नाम का स्टार्टअप खड़ा कर दिया है। आज कंपनी का टर्नओवर 50 लाख रुपये से ज्यादा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड16 Dec 2025, 06:15 AM IST
Success Story: 50,000 रुपये लगाकर कंपनी की शुरुआत की थी।
Success Story: 50,000 रुपये लगाकर कंपनी की शुरुआत की थी।

Success Story: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की मेलखेड़ा की नेहा मुजावदिया ने देश - विदेश में ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए धाक जमाई है। नेहा जब पढ़ाई के लिए अपने गांव से बाहर बड़े शहर में गईं तो उन्हें पता चला कि गांव के बच्चे शहरों के बच्चों के मुकाबले बहुत पीछे हैं। बस इसी कसक में आनलाइन टीचिंग स्टार्टअप 'ट्यूटरकेबिन' ((TutorCabin) की शुरुआत कर दी। हालांकि यह सब करना नेहा के लिए आसान नहीं था। उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

द वीकेंड लीडर में छपी खबर के मुताबिक, नेहा ने अपने गांव में 8 वीं कक्षा तक सरकारी स्कूल से हिंदी माध्यम में पढ़ाई की। इसके बाद गांव से 8 किमी दूर शहर से 12वीं तक पढ़ाई की। फिर BA करने के लिए उन्होंने एक छोटे कस्बे में एडमिशन लिया। गांव के लोगों ने नेहा के पिता को आगे पढ़ाने से मना किया। नेहा के ऊपर शादी का दबाव था, लेकिन वो अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थीं। हालांकि नेहा के घरवाले भी नेहा के समर्थन में आ गए फिर MBA करने के लिए इंदौर भेज दिया।

इंदौर में नेहा की बदली किस्मत

नेहा ने अपने गांव से 200 किमी दूर इंदौर से MBA किया। इस दौरान वो हॉस्टल में रहीं। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेहा ने इंदौर के एक कोचिंग संस्थान में नौकरी की। कुछ सालों तक वहां पढ़ाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि छात्रों को दी जा रही फीस के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है। साथ ही, उन्हें छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए कुछ करने की इच्छा थी।

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यहीं से उनके मन में एक एड-टेक स्टार्टअप शुरू करने का विचार आया। साल 2018 में उन्होंने सिर्फ 50,000 रुपये के शुरुआती निवेश से ट्यूटरकैबिन (TutorCabin) की शुरुआत की। उन्होंने अपने कुछ शिक्षक दोस्तों के साथ मिलकर काम शुरू किया। ये कम वेतन पर भी उनके साथ जुड़ने को तैयार हो गए।

IIM बेंगलुरु ने किया सम्मानित

रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दौर में ट्यूटरकैबिन एक छोटी सी कोचिंग थी। इसमें केवल 20 छात्र थे। लेकिन, बेहतर कोचिंग और कम फीस के कारण इसका नाम जल्द ही दूर-दूर तक फैल गया। पहले साल में ही नेहा ने स्‍टार्टअप से 5 लाख रुपये की कमाई की। उनकी कड़ी मेहनत का तीजा ये रहा है कि आईआईएम बेंगलुरु ने बेस्ट स्टार्टअप का अवार्ड दिया।

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वहीं भारत सरकार की तरफ से दुबई गए एक प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा के क्षेत्र से एकमात्र नेहा मुजावदिया को ही चुना गया। कोरोना महामारी के दौरान नेहा ने अपने व्यवसाय को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया। इससे उन्हें पूरे देश से छात्रों और शिक्षकों को जोड़ने का मौका मिला। देखते ही देखते उनका रेवेन्यू बढ़ता गया और एक छोटे से गांव की लड़की का सपना एक बड़े स्टार्टअप में बदल गया।

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