Success Story: योगी सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का जो संकल्प लिया है, वह केवल एक नारा नहीं बल्कि लाखों युवाओं के जीवन में बदलाव की कहानी बन चुका है। सरकार की योजनाएं आज गांव-गांव तक पहुंच रहीं हैं और युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहीं हैं। लखीमपुर खीरी की निकिता वर्मा ने अपनी उद्यमिता से सफलता की नई इबारत लिखी है।
न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, लखीमपुर खीरी जिले के शाहपुर राजा गांव की निवासी निकिता वर्मा ने सीमेंट ईंट निर्माण का कारोबार शुरू कर न सिर्फ खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा किए। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 25 लाख रुपये का लोन लेकर अपना प्लांट स्थापित किया।
निकिता ने 25 लोगों को दिया रोजगार
निकिता के प्लांट में रोजाना करीब 5000-7000 ईंटों का उत्पादन होता है। इससे उन्हें हर महीने करीब 1 लाख का मुनाफा होता है। निकिता ने इस काम के लिए 25 लोगों को रोजगार दिया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। निकिता की यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तीकरण की दिशा को मजबूती दे रही है।
उनका प्रयास न केवल अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रहा है। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि सही अवसर और सरकारी सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार का सहारा बन सकती हैं, बल्कि समाज की प्रगति में भी इंजन की भूमिका निभा सकती हैं।
जानिए PMEGP योजना क्या है
'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' (PMEGP) जैसी योजना उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो गांव में रहकर ही अपना छोटा या बड़ा उद्योग शुरू करना चाहते हैं। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार इसमें सिर्फ लोन ही नहीं देती, बल्कि भारी सब्सिडी भी मुहैया कराती है। इससे बिजनेस शुरू करने का बोझ आपके कंधों पर कम से कम रहता है।
इन सेक्टर के लिए बड़ी आर्थिक मदद
इस योजना के तहत आप दो तरह के काम शुरू कर सकते हैं। मैन्युफैक्चरिंग यानी सामान बनाने का यूनिट या फिर सर्विस सेक्टर का काम। अगर आप कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट डालना चाहते हैं तो सरकार आपको 50 लाख रुपये तक का लोन दिलाने में मदद करती है। वहीं सर्विस सेक्टर यानी सेवा क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए 20 लाख रुपये तक के लोन का प्रावधान है।
इसका मतलब यह है कि आप अपनी पसंद और हुनर के हिसाब से दाल मिल, मसाला उद्योग, रिपेयरिंग सेंटर या कोई भी और छोटा कारखाना खोल सकते हैं। लोन की यह राशि सीधे बैंक के जरिए मिलती है। इससे आपको अपनी मशीनरी खरीदने और शुरुआती सेटअप तैयार करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
ऐसे मिलती है सब्सिडी
PMEGP योजना की असली ताकत इसकी सब्सिडी है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले सामान्य वर्ग के लोगों को प्रोजेक्ट की कुल लागत पर 25 फीसदी की सब्सिडी मिलती है। वहीं महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और पूर्व सैनिकों जैसे विशेष वर्गों के लिए यह सब्सिडी 35 फीसदी तक पहुंच जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप गांव में बिजनेस शुरू करते हैं तो आपको लोन की एक बड़ी रकम वापस ही नहीं करनी पड़ेगी।