बिहार के शख्स ने 2 लाख में शुरू किया 'मस्त बनारसी पान', खड़ा कर दिया 7 करोड़ का साम्राज्य

Success Story: गली-नुक्कड़ के बिजनेस पान को पी. एन. ठाकुर ने एक नया ब्रांड दिया। ठाकुर ने 'मस्त बनारसी पान' के तहत 2 लाख रुपये में बिजनेस शुरू किया। आज कंपनी के पास 400 से ज्यादा आउटलेट्स हैं। देश के कई शहरों में 'मस्त बनारसी पान' के आउटलेट्स देखने को मिल जाएंगे।

Jitendra Singh
अपडेटेड5 May 2026, 06:11 AM IST
Success Story: मस्त बनारसी पान का कारोबार देश के 300 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है।
Success Story: मस्त बनारसी पान का कारोबार देश के 300 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है।

Success Story: कभी गलियों और नुक्कड़ों तक सीमित रहने वाला पान आज कैफे कल्चर का हिस्सा बन चुका है। पारंपरिक दुकानों से निकलकर यह कारोबार अब आधुनिक आउटलेट्स, बेहतर प्रेजेंटेशन और ब्रांडेड अनुभव के साथ नई पहचान बना रहा है। इस बदलाव के पीछे जिन नामों ने अहम भूमिका निभाई, उनमें एक नाम P. N. ठाकुर का है। किसान परिवार से आने वाले पीएन ठाकुर ने पान जैसे अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में बड़ा अवसर देखा। बचपन से उन्होंने पान की दुकानों को करीब से देखा, लेकिन उनमें न साफ-सफाई थी और न कोई ब्रांड वैल्यू। MBA की पढ़ाई और नौकरी के अनुभव ने उन्हें यह समझाया कि एक साधारण प्रोडक्ट को सही रणनीति के साथ बड़े बिजनेस में बदला जा सकता है।

ठाकुर ने साल 2016 में 2 लाख से मस्त बनारसी पान (Mast Banarasi Paan) की शुरुआत की। इस सफर में उनकी पत्नी माया कुमारी ने नौकरी छोड़कर अपनी सेविंग्स बिजनेस में लगाई। सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों ने भरोसे और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया। आज यह कारोबार 7 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। ठाकुर ने यह मुकाम बिना किसी बाहरी फंडिंग के हासिल किया है। उन्होंने अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर को एक ब्रांडेड बिजनेस में बदल दिया है।

MBA पास शख्स ने कैसे खोली पान की दुकान

मिंट हिंदी के साथ बातचीत करते हुए P. N. ठाकुर कहते हैं कि वो किसान परिवार से आते हैं। उनके परिवार बिजनेस का कोई माहौल नहीं था। नौकरी और किसानी का ही माहौल था। बिहार के बक्सर के रहने वाले ठाकुर बताते हैं कि उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से MBA किया था। इसके बाद कुछ समय तक नौकरी की, लेकिन नौकरी में मन नहीं लगा और लीक से हटकर कुछ काम करने का मन कर रहा था।

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ऐसे में नौकरी छोड़कर पान का बिजनेस करने का आइडिया आया। ठाकुर बताते हैं कि जैसे ही उन्होंने ये बात अपने पिता जी को बताई कि नौकरी छोड़कर पान का कारोबार करेंगे तो उनकी तबियत खराब हो गई थी। ऐसे में मेरे लिए पान के बिजनेस में उतरने के लिए बड़ी हिम्मत की जरूरत थी। फिर पत्नी ने अपनी कुछ जमा पूंजी दी और मेरे इस बिजनेस के लिए नौकरी भी छोड़ दी। इसके बाद 'मस्त बनारसी पान' का कारोबार शुरू किया।

80 तरह के लगाते हैं पान

पीएन ठाकुर आगे बताते हैं कि उन्होंने पान का पहला कारोबार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में शुरु किया था। इसे शुरू करने में जितनी लागत आई थी। वह एक साल में निकल आई थी। आज मस्त बनारसी पान ब्रांड के तहत कंपनी 70-80 तरह के पान लगाती है। इन सभी पानों में तंबाकू नहीं मिलाया जाता है। यानी टोबैको फ्री पान हैं। कंपनी चॉकलेट पान, मैंगो पान, ड्राई फ्रूट्स पान, सिल्वर पान, गोल्ड पान, आइसक्रीम पान जैसे कई नाम से पान बनाती है। ग्राहकों की सुविधानुसार पान लगाए जाते हैं।

मस्त बनारसी पान में मिलता है पारिवारिक माहौल

कंपनी अपने आउटलेस्ट में पारिवारिक माहौल मुहैया कराती है। ठाकुर का कहना है कि पान खाने का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के दिमाग में नेगेटिव सोच आती है। इसी नेगेटिव सोच को खत्म करने के लिए मस्त बनारसी पान लॉन्च किया गया है। पान का इस्तेमाल कलयुग ही नहीं इसके पहले सतयुग - त्रेतायुग से हो रहा है।

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पान में सेहत के लिए फायदेमंद चीजें मिलाई जाती हैं। कंपनी के आज 400 से ज्यादा आउटलेस्ट हैं। भारत के 300 से ज्यादा शहरों में कंपनी का कारोबार फैला हुआ है। इसमें मोहाली, बेंगलुरु, दिल्ली, पुणे, विजयवाड़ा, मथुरा, जालंधर, श्रीनगर, जयपुर, रांची, जमशेदपुर, पटना, वडोदरा और हैदराबाद जैसे कई शहर शामिल हैं।

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