Success Story: आपदा को अवसर में बदलने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा लोगों को प्रेरित करते रहे। इसका असर यह हुआ कि जब देश थम गया था। रेल का पहिया रुक गया था। उस दौर में दो लोगों ने आपदा को कुछ ऐसे अवसर में बदला कि आज उनकी कमाई के लिए एक नई खिड़की खुल गई।
मंगेश और प्रशांत ने कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान 'शुद्धमय' आटा मिल की स्थापना की। इसके पहले मंगेश और प्रशांत मीडिया में नौकरी करते थे। आज यह आटे बिजनेस लाखों रुपये में पहुंच गया है। यह ब्रांड मुंबई के बाजार में मजबूत पकड़ बना चुका है।
आटा से बदली तकदीर
‘शुद्धमय’ आटा मिल मुंबई के कांदिवली स्टेशन से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर है। उन्होंने पारंपरिक गेहूं और चावल के आटे के साथ-साथ मल्टीग्रेन 7.4 जैसे खास आटे भी बाजार में उतारे हैं। उनकी सेवा का एक खास पहलू यह है कि वे तीन किलोमीटर के दायरे में पांच किलो से अधिक आटे की फ्री में डिलीवरी करते हैं। इससे ग्राहकों को सुविधा मिलती है और उनका बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है।
नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस
प्रशांत और मंगेश की कहानी आम लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। दोनों पहले अच्छी-खासी नौकरियों में थे। मंगेश एक मीडिया कंपनी में काम करते थे, जहां उन्हें करीब 35,000 महीने सैलरी मिलती थी। प्रशांत की भी सैलरी लगभग इतनी ही थी। लेकिन लॉकडाउन ने उनकी सोच और जिंदगी दोनों को बदल दिया।
लॉकडाउन के समय जब सभी घरों के भीतर दुबकने के लिए मजबूर थे। उस दौर में प्रशांत और मंगेश ने सोचा कि लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत ताजा राशन की है। बस इसी सोच के साथ आटे का बिजनेस शुरू कर दिया। आज दोनों लोग मंगेश और प्रशांत सालाना करीब 16 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
उनका कहना है कि मुंबई के लोग हमारे ब्रांड को काफी पसंद कर रहे हैं। कई ग्राहक तो यह भी कहते हैं कि हमें पहले ही यह काम शुरू कर देना चाहिए था। इसकी वजह ये है कि लोगों को शुद्ध और भरोसेमंद आटे की जरूरत रहती है।