Success Story: कहते हैं जहां चाह है वहां राह है। रास्ता भले ही न हो, लेकिन मन में ठान लो तो वहीं से एक नया रास्ता खुल जाता है। कुछ ऐसे ही आगरा के प्रोफेसर साहब ने एक नया रास्ता चुना। उनका यह नया रास्ता नी पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। आगरा के दयालबाग कॉलेज में प्रोफेसर ऋषभ सत्संगी इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाते हैं। फिर शाम को शहर में ही नींबू-पानी का ठेला लगाते हैं। उनकी यह कहानी हर किसी को अपनी ओर खींच सकती है।
न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, ऋषभ दयालबाग कॉलेज में बीटेक छात्रों को इंजीनियरिंग फाउंडेशन कोर्स- ऑटोमोबाइल सिस्टम विषय पढ़ाते हैं। उन्होंने दयालबाग रोड पर “कूल पॉइंट” नाम का स्टॉल लगाते हैं। इस स्टॉल से ऋषभ की अतिरिक्त कमाई तो हो रही है। इसके साथ ही वो समाज को एक संदेश भी दरे हैं कि कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता है।
ऋषभ क्यों लगाते हैं नींबू-पानी का ठेला
न्यूज 18 से बातचीत करते हुए ऋषभ सत्संगी ने कहा कि वो पहले घर का खाना नहीं खाते थे। हमेशा बाहर ही खातेथे। कॉलेज से पढ़ाने के बाद हमेशा फ्री रहते थे। लिहाजा समय का सदुपयोग करना बहुत जरूरी था। वहीं बाहर खाने की आदत को भी छोड़ना था। ऐसे में नींबू-पानी का स्टॉल लगाने का आइडिया आया। उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर सबसे ज्यादा उनके छात्र आते हैं। शाम को 7 बजे से रात 11 बजे तक स्टॉल पर नींबू-पानी पिलाते हैं। इससे अतिरिक्त कमाई भी हो जाती है। यहां नींबू पानी और सोडा पीने वालों की हमेशा भीड़ लगी रहती है।
फिलहाल ऋषभ अपने इस काम से शहर में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया में भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनके इस काम की हर कोई तारीफ कर रहा है। ऋषभ का यह आडिया यंगिस्तान के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। आज की युवा पीढ़ी प्रोफेसर ऋषभ से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन्हें यह सोचना चाहिए कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता है। हर काम बराबर होता है।
छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
प्रो. ऋषभ ने बताया कि इस समय उनके साथ 3-4 लोग काम कर रहे हैं। शहर में पांच से छह जगह पर नींबू-सोडा की स्टॉल लगाने का प्लान है। टीम बनाकर शुरुआत करेंगे। इसके लिए लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया है, इससे न सिर्फ काम आगे बढ़ेगा बल्कि युवा आत्मनिर्भर भी बनेंगे।