Success Story: आजकल के इस अर्थयुग में लोग अब पारंपरिक खेती छोड़कर नकदी फसल की ओर रूख कर रहे हैं। अब खेती में पढ़े-लिखे युवा भी आने लगे हैं। बहुत से लोग कॉर्पोरेट की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर किसान बन रहे हैं। कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के राघव शरद भी लाखों की नौकरी छोड़कर किसान बन गए। शरद अमेरिका में पायलट की नौकरी कर रहे थे। फिर एक ऐसा सवाल आया, जिसे सुनकर उन्होंने पायलट की नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया अमेरिका से भारत चले आए और खेती करना शुरू कर दिया। आज खेती से ही छप्परफाड़ कमाई कर रहे हैं।
न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, राघव शरद देवस्थले ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तराखंड में एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद खेती की ओर मुड़ गया। उन्होंने बताया कि एक बच्चा यह कहने में हिचकिचा रहा था कि उसके पिता किसान है। इसके बाद उन्होंने किसान बनने का फैसला कर लिया।
महाराष्ट्र के रहने वाले हैं शरद
न्यूज 18 के मुताबिक, राघव शरद देवस्थले मूलरूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर में उनका जन्म हुआ। शरद अमेरिका (USA) में पायलट की ट्रेनिंग के बाद लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम मतमुर में रहकर खेती करना शुरू कर दिया है।
5 साल पहले उन्होंने यहां तुलसी और लेमन ग्रास की आर्गेनिक खेती शुरू की। आज वे इसी खेती से निकलने वाले उत्पादन को सोलर ड्रायर की मदद से सुखाते हैं। अलग – अलग प्रोडक्ट बनाते है, जिससे सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमाते हैं।
शरद खुद ही बनाते हैं प्रोडक्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, आज उनकी यूनिट से लेमन टी, ट्राइबल टी मसाला, चाट मसाला, हाइड्रेट लाल अमाड़ी और धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनते हैं। इनकी स्थानीय बाजारों से लेकर अन्य जिलों तक अच्छी मांग है। वह अपने उत्पादन ऑनलाइन भी बेचते हैं। इससे उन्हें खेती से कई गुना ज्यादा आय होने लगी है। शरद ने बताया कि वो नौकरी छोड़ कर भारत लौट आए। इसके बाद इंदौर में दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाने का काम भी किया। फिर उन्होंने 2013 से 2016 तक उत्तराखंड में राहत कार्यों सेवाएं दी। शरद आज युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।