Success Story: कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। कुछ ऐसा ही राहुल सिन्हा ने अपने हौसलों के दम पर जीवन में खास मुकाम हासिल किया। मौजूदा समय में राहुल बिहार प्रशासनिक सेवा में जिला उप मजिस्ट्रेट (SDM) के रूप में काम कर रहे हैं। 12 साल के संघर्ष के बाद उन्हें SDM का पद मिला है। उन्होंने खुद एक वीडियो में अपनी प्रेरणादायक कहानी शेयर की है।
राहुल ने IIT में एडमिशन के लिए तीन बार कोशिश की थी। हर बार उन्हें असफलता हाथ लगी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते रहें। बीपीएससी परीक्षा पास करने से पहले उन्होंने 12 साल से अधिक समय तक कड़ी मेहनत की। एक समय जो खुद को फेलियर मानते थे, वो आज लाखों के लिए प्रेरणा हैं।
युवाओं को करते हैं मोटिवेट
SDM राहुल सिन्हा अक्सर अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। इन वीडियो में वह अपने संघर्ष और एसडीएम बनने तक के सफर को लोगों के साथ शेयर करते हैं। उनका एक वीडियो इन दिनों काफा वायरल हो रहा है। जिसमें वह अपनी पढ़ाई के बारे में बात कर रहे हैं। राहुल ने बताया कि लोग अक्सर कहते हैं कि पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। मेरे 10वीं में केवल 52 फीसदी अंक आए। मैंने तीन बार आईआईटी का अटैम्प्ट दिया, लेकिन तीनों बार क्वालिफाई नहीं किया और उसके बाद मैंने बीपीएससी क्वालिफाई कर लिया।
लगभग 12 साल मैंने इधर-उधर बहुत धक्के खाते रहे। राहुल ने आगे बताया कि जब जागो तब सवेरा वाला हिसाब है। आपका पुराना रिकॉर्ड कोई मायने नहीं रखता है। जिस दिन आप जागते हैं , वही आपकी नई शुरुआत है। आप कब मेहनत करते हैं, कितनी मेहनत करते हैं, आपको सफलता तभी मिलती है। आप जब जाग जाइएगा, आपकी सिलेक्शन तभी हो जाएगा।
राहुल बने SDM
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राहुल सिन्हा ने BPSC मेन्स में 538 अंक और इंटरव्यू में 102 अंक हासिल करके SDM का पद हासिल किया। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) 2019 की परीक्षा में 92वीं रैंक मिली थी। मौजूदा समय में वो एसडीएम के पद पर हैं। उनकी कहानी अब लोगों के लिए एक उदाहरण है कि नंबरों से नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प से फर्क पड़ता है।