Success Story: तुलसी के पौधे की तरह ही तुलसी माला को भी हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। तुलसी माला, तुलसी की लकड़ी से बनाई जाती है। तुलसी के माला की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इस मांग को राजस्थान की ओमवती ने पहले ही भांप लिया। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में ही तुलसी की माला बनाने का कारोबार शुरू कर दिया। उनके पास न को ई मशीन, न कोई सुविधा, सिर्फ अपनी मेहनत के दम पर तुलसी का कारोबार खड़ा कर दिया है। आज इसके जरिए घर पर ही रहकर कमाई कर रही हैं।
लोकल 18 में छपी खबर के मुताबिक, ओमवती पैसों से तुलसी खरीदती हैं। फिर अपने घर पर ही माला बनाने का काम करती हैं। यह काम करने का उन्के पास कई सालों का लंबा अनुभव है। उनकी बनाई हुई मालाओं की मांग राजस्थान ही नहीं बल्कि मथुरा, वृंदावन, काशी, हरिद्वार और गोवर्धन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों तक है। धार्मिक दृष्टि से तुलसी की माला को बेहद पवित्र माना जाता है। इसी कारण से इनके उत्पादों को तीर्थ स्थलों के दुकानदारों और श्रद्धालुओं से अच्छी मांग रहती है।
परिजनों से छिपकर सीखा काम
ओमवती राजस्थान के भरतपुर जिले के बैलारा गांव की रहने वाली हैं। ओमवती कहती हैं कि उनका बेटा मथुरा के जैत से तुलसी की माला बनाने का काम सीख कर आया था। बेटा घर पर ही तुलसी की माला बनाता था। ऐसे में मुझे भी तुलसी की माला बनाने की इच्छा हुई, इसके लिए बेटे से कहा कि मुझे भी सिखा दो, लेकिन बेटे ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद जब बेटा घर पर नहीं होता था, तो उसकी मशीन से माला बनाना शुरू कर दिया। एक महीने में ही बिना किसी के सिखाए तुलसी की माला बनाने का काम सीख लिया। आज ओमवती अपने घर ही रहकर हर महीने 30-40 हजार रुपये कमा रही हैं। इसके साथ ही महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं।
आईआईटी दिल्ली ने गिफ्ट की मशीन
ओमवती ने सिर्फ खुद की कहानी ही नहीं, बल्कि अन्य महिलाओं की भी स्थिति में सुधार किया है। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, उड़ीसा, कोलकाता में महिलाओं को संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण दिया है, जिससे वह आत्मनिर्भर बनकर अपना जीवन गुजार सकें। उनके इस काम को देखते हुए कई संस्था और IIT दिल्ली की ओर से उन्हें तुलसी माला बनाने की मशीन गिफ्ट दी गई है।