
Success Story: कहते हैं संघोर्षों के सागर में जिसने दिन रात नहाया है, ऐसे ही वीर नागरिकों ने स्वर्णिम इतिहास बनाया है। ये लाइन मध्य प्रदेश के राजू धनोटिया पर सटीक बैठ रही हैं। राजू धनोटिया कभी एक दुकान में झाड़ू पोछा लगाते थे। लोग उन्हें छोटू कहकर बुलाते थे। आज छोटू का कारोबार 20 करोड़ से ऊपर का पहुंच गया है। छोटू ने यह कमाल मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधान इंदौर में किया। पिछले कुछ सालों में यहां सैकड़ों स्टार्टअप फले-फूले हैं। ऐसे ही कुछ साल पहले इंदौर में 'उत्साह' नाम का एक रेस्टोरेंट शुरू हुआ था। इसके फाउंडर सिर्फ 12वीं पास हैं। आज उस आउटलेट की रोज़ की सेल्स ₹4-5 लाख है। सालाना बिज़नेस ₹18-20 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
दिव्य मराठी में छपी खबर के मुताबिक, राजू का कहना है कि मैं पहले चाय बेचता था। मैंने कभी नहीं सोचा कि एक दिन बॉस बनूंगा और लग्जरी लाइफ जीएंगे। मैं भी अपने कर्मचारियों की तरह आम कपड़े पहनता हूं। कुछ लोग जब रेस्टोरेंट में खाना खाने आते हैं। गाड़ी पार्क करते हैं तो वो मुझे भी 20 रुपये टिप दे देते हैं। मैं मुस्करा कर चुपचाप रह जाता हूं।
राजू धनोटिया मध्य प्रदेश के इंदौर से करीब 200 किलो मीटर दूर मंदसौर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। राजू का कहना है कि घर में पढ़ाई का माहौल था, लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से आगे की पढ़ाई नहीं हो पाई और चाय की दुकान में काम करना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में राजू को चाय की दुकान में झाड़ू-पोछा का काम मिला। राजू बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे।
उन्हें नवोदय स्कूल में एडमिशन मिल गया। यहां से 12वीं के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो गई। राजू पढ़ाई के मकसद से इंदौर आए थे। लेकिन यहां खर्च निकालना भारी पड़ रहा था। ऐसे में राजू ने एक चाय की दुकान में काम करना शुरू कर दिया। धीरे - धीरे उन्हें STD बूथ पर काम करने का मौका मिला। यहीं से उन्हें बिजनेस का आइडिया आया।
राजू बताते हैं कि एक दिन मैंने अपने STD बूथ के मालिक से पूछा कि महीने में कितनी कमाई होती है। मालिक ने कहा कि लगभग 17,000 रुपये की कमाई हो जाती है। तपाक से राजू ने कहा कि मैं आपको 24,000 रुपये महीना दूंगा। आप दुकान मुझे किराए पर दीजिए। पहले तो मालिक को लगा कि राजू मजाक कर रहा है। जब बाद में देखा कि राजू सीरियस है तो उन्होंने हां कर दिया।
इसके बाद राजू ने उसी दुकान को चलाना शुरू किया। सबसे पहले राजू ने दुकान की टाइमिंग बढ़ाई। दुकान सुबह 4 बजे खुल जाती। नजदीक में स्टेशन होने की वजह से बहुत से लोग फोन करते आते कि वो पहुंच गए हैं या ट्रेन पकड़ने वाले हैं। इसके साथ ही चाय, बिस्किट, पानी और नमकीन बेचना भी शुरू कर दिया। इससे कमाई बढ़ गई। बाद में राजू ने सिम बेचना भी शुरू कर दिया। कुल मिलाकर राजू ने हर तरह के बिजनेस में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।
दिव्य मराठी के साथ बातचीत करते हुए राजू ने कहा कि उन्होंने एक चाय की दुकान शुरू की। कई तरह की चाय बनाना शुरू किया। चाय की क्वालिटी से पोहा और जलेबी भी बिकने लगा। राजू ने बताया कि साल 2018 में रोजाना 3 क्विंटल दूध की चाय बिक्री होती थी। चाय की कमाई से उन्होंने जमीन खरीद ली। कुछ पैसे कम पड़ रहे थे तो भाइयो से उधार लिया और फिर बैंकों से लोन लेकर उत्साह नाम का रेस्टोरेंट खोल दिया। राजू का कहना है कि वो ग्राहकों को भगवान मानते हैं और बिक्री के सामान को प्रसाद मानते हैं।
राजू का कहना है कि आज रेस्टोरेंट में 168 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। राजू ने अपने गांव से कई लोगों को बुलाया और रेस्टोरेंट में काम दिया। इसमें कई कर्मचारी राजू के साथ रेस्टोरेंट खोलने के पहले से जुड़े हुए हैं।
राजू कहते हैं कि उन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं है। आज मैनेजमेंट के छात्र उनका बिजनेस आइडिया समझने आते हैं। वो यहां इंटर्नशिप करते हैं। राजू MBA कॉलेज में लेक्चर देने जाते हैं। वो वहां अपना अनुभव शेयर करते हैं। राजू रेस्टोरेंट के बाहर रोजाना सुबह फ्री में जूस और स्प्राउट्स बांटते हैं। चाय की दुकान 24 घंटे खुली रहती है। कुल मिलाकर राजू बिजनेस के साथ समाज सेवा भी कर रहे हैं।
राजू ने बताया कि मेरा लक्ष्य है कि देश के हर शहर में उत्साह रेस्टोरेंट खुले। एक लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी दी जाए। राजू ने बताया कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक सफाई कर्मी करोड़ों की कंपनी का मालिक बन जाएगा। जिसे लोग पहले ऐ राजू, ऐ छोटू कहते थे और गालियां भी देते थे, आज स्नैक्स-बेकरी और मिठाई इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम है।
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