कपड़ों के कबाड़ के बिजनेस से महिला बन गई करोड़पति, पढ़ें संघर्ष की गाथा

Success Story: ऋचा जैन की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है। उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी से जंग जीतकर 1500 रुपये में स्टार्ट अप किया। आज उनका कारोबार करोडो़ं में पहुंच गया है। इसके साथ ही वह दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड2 May 2026, 06:00 AM IST
Success Story:रितु ऋचा जैन ने टेक्सटाइल वेस्‍ट को रीसाइकल करके कागज बनाना शुरू किया।
Success Story:रितु ऋचा जैन ने टेक्सटाइल वेस्‍ट को रीसाइकल करके कागज बनाना शुरू किया।

Success Story: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतने वाली एक महिला ने अपनी कठिनाईयों को मात देते हुए न सिर्फ अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की, बल्कि कपड़ों के कबाड़ से करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह प्रेरणादायक कहानी सूरत के रितु ऋचा जैन की है। जिन्होंने मुश्किलों से उबरने के बाद खुद को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। रितु ने कैंसर जैसी बीमारी को हराकर पुरुषों के वर्चस्व वाले उद्योग में खुद की अलग पहचान बनाई है।

सूरत में रहकर रितु ने कपड़ों के कबाड़ यानी टेक्‍सटाइल वेस्‍ट को रीसाइकल किया। इससे इको-फ्रेंडली स्टेशनरी और पेपर उत्पादों का प्रीमियम ब्रांड खड़ा किया। उनकी कंपनी का नाम 'पेपरडम' (Paperdom) है। इसकी नींव 2012 में रखी गई थी। अब यह 20 करोड़ का सफल वेंचर बन चुकी है।

25 लाख रुपये में शुरू किया कपड़ों के कबाड़ का बिजनेस

द बेटर इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, रितु ने टी एंड टीवी हाईस्‍कूल, वीवी नगर से पढ़ाई की। 2005 में उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की। 2007 में गुजरात यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी मं एमएससी किया। 2007 में उन्हें IIT बॉम्बे में जूनियर रिसर्च फेलोशिप मिली। लेकिन, 2009 में उन्होंने अपनी असली पहचान की तलाश में इसे छोड़ दिया। 2011 में वह जयपुर के सांगानेर गईं। वहां उन्होंने पेपर बनाने की एक वर्कशॉप में भाग लिया। यह अनुभव उनकी जिंदगी बदल देने वाला था। रितु ऋचा जैन ने 2012 में 25 लाख रुपये के निवेश से 'पेपरडम' की नींव रखी।

यह भी पढ़ें | गाय खरीदकर बन गए करोड़पति, ऐसे शुरू हुआ कमाई का सफर

पेड़ों से नहीं बनाती कागज

रितु की कंपनी कपड़ों के कबाड़, मिलों के धागों और केले के रेशों को रीसाइकल करके पेपर बनाती है। कंपनी हर महीने 10 से 15 टन कपड़े के कबाड़ को रीसाइकल करती है। साल 2020 में उन्होंने थोक पेपर बेचने के बजाय खुद के तैयार उत्पाद बनाने का फैसला किया। उन्होंने 30 तरह के आइटम लॉन्च किए। इनमें नोटबुक, प्लानर, स्केचबुक और गिफ्ट हैंपर शामिल थे। इस कदम से उनकी सीधी पेपर बिक्री 80% तक घट गई। लेकिन, कंपनी को एक खास प्रीमियम ब्रांड के तौर पर पहचान मिली। आज उनके उत्पादों की रेंज बढ़कर 45 तक पहुंच गई है।

यह भी पढ़ें | इंजीनियरिंग छोड़ शख्स बना पशु पालक, डेयरी से शुरू कर दिया बंपर कमाई

रितु ने कैंसर को दी मात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब रितु का बिजनेस चलने लगा। उनकी मेहनत रंग लाई, तभी उनको एक ऐसी बीमारी ने घेर लिया, जिससे बचना रितु के लिए मुश्किल हो गया। रितु ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ गई थी। उन्हें मौत बेहद नजदीक नजर आने लगी थी, वो बहुत परेशान हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी बीमारी का जिक्र सोशल मीडिया में किया। इससे उन्हें कुछ हल्कापन महसूस हुआ। धीरे-धीरे कुछ ऐसा हुआ कि कैंसर की बीमारी से ठीक होने लगी। आज वो पूरी तरह से ठीक होने के कगार पर पहुंच गई हैं। आज उनकी कंपनी का राजस्व 20 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होमट्रेंड्सकपड़ों के कबाड़ के बिजनेस से महिला बन गई करोड़पति, पढ़ें संघर्ष की गाथा
More