
Success Story: आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। पढ़ाई, नौकरी और बिज़नेस के साथ-साथ अब महिलाएं गांव और कस्बों में भी आत्मनिर्भर बनने के लिए नए रास्ते खोज रही हैं। कुछ ऐसे ही महाराष्ट्र के सतारा जिले के सुलेवाड़ी गांव की रोहिणी प्रकाश पाटिल ने मधुमक्खी पालन का बिजनेस शुरू किया और आज लाखों में कमाई कर रही हैं। रोहिणी ने घर-गृहस्थी और खेती-बाड़ी के कामों से आगे बढ़कर अपनी एक अनूठी पहचान बनाई है। रोहिणी की जिंदगी अखबार के एक विज्ञापन ने बदल दिया। विज्ञापन के जरिए उन्हें मधुमक्खी पालन का बिजनेस करने की प्रेरणा मिली।
महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, रोहिणी ने मधुमक्खी पालन का बिजनेस शुरू करने से पहले 35 महिलाओं का एक समूह बनाकर महाबलेश्वर में पाँच दिनों का विशेष प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने शहद का कारोबार शुरू किया। आइये रोहिणी की सफलता के बारे में जानते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रोहिणी ने अप्रैल 2014 में खादी ग्रामोद्योग प्रशिक्षण संस्थान से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। गांव की अन्य महिलाओं के साथ, उन्होंने मधुमक्खियों की देखभाल और शहद निकालने की तकनीक सीखी। प्रशिक्षण के बाद, 15 महिलाओं ने 5,000 रुपये की पूंजी लगाकर एक स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाया। हालांकि, यह समूह जल्द ही बिखर गया। अन्य सदस्यों को उनकी पूंजी लौटाने के बाद, रोहिणी ने अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला किया। उनके पास निवेश करने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में रोहिणी ने एक साहसिक कदम उठाया। रोहिणी ने अपने गहने गिरवी रखे। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये का कर्ज लिया और साल 2017 में 35 मधुमक्खी बक्सों के साथ अपना कारोबार शुरू किया।
रोहिणी ने जब मधुक्खी पालन का बिजनेस शुरू किया तो शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने जो बक्से खरीदे थे, उनसे मधुमक्खियां उड़ गईं। पहले चरण में उन्हें 35 बक्सों से सिर्फ़ 80 किलो शहद मिला, जिसे उन्होंने 600 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा। लेकिन रोहिणी ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सीखी तकनीकी के आधार पर बाहर से लाए गए बक्सों में मधुमक्खियों को बसाया।
एनजीओ 'धर्म लाइफ' के सहयोग से उन्होंने पैकेजिंग और ब्रांडिंग सीखी। अपने उत्पाद को 'फॉरेस्ट हनी' के नाम से लॉन्च किया। उनका शहद खास है। कारण है कि वह बक्सों को पश्चिमी घाट के जैव-विविधता वाले कोयना बांध के जंगलों में रखती हैं, जहां जामुन, हिरदा जैसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं। इससे शहद में ऑर्गेनिक और औषधीय गुण आ जाते हैं। रोहिणी पाटिल की मेहनत रंग लाई और उनका कारोबार तेजी से बढ़ा। आज उनके पास 112 मधुमक्खी बक्से हैं। इनसे उन्हें सालाना लगभग 880 से 900 किलो शहद मिलता है।
वह इस ऑर्गेनिक शहद को 1,200 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव पर सीधे ग्राहकों को बेचती हैं। उनके पास मांग इतनी ज्यादा है कि उन्हें किसी थोक व्यापारी या खुदरा विक्रेता के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ग्राहक उनके घर पर ही आ जाते हैं। शहद बेचने के अलावा, वह किसानों को परागण यानी पॉलिनेशन सेवाओं के लिए 7,500 रुपये में मधुमक्खियों वाले बक्से बेचकर भी अच्छी कमाई करती हैं।
मधुमक्खी पालन के बिजनेस से रोहिणी की सालाना कमाई 25 लाख रुपये पहुंच गई है। रोहिणी की अगली योजनाएं शहद और ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए सुपरमार्केट खोलना, सब्जियों को सौर ऊर्जा से सुखाना और ऑर्गेनिक खेती शुरू करना है। रोहिणी प्रकाश पाटिल की कहानी ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की है।
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