Success Story: राजस्थान के रेगिस्तान की धरती पानी की प्यासी होती है। यहां पानी की एक-एक बूंद की बहुत बड़ी अहमियत है। इस रेगिस्तान में अगर कोई अनार-सेब की खेती करके सफल हो जाए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। कुछ ऐसा ही राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की रहने वाली महिला किसान संतोष देवी ने कर दिखाया है। संतोष की इस सफलता पर जयपुर में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। संतोष देवी ने शेखावाटी की सूखी और बंजर मानी जाने वाली जमीन पर सेब और अनार की सफल बागवानी कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, उन्हें यह आमंत्रण डाक के जरिए मिला है। इस बात की जानकारी मिलते ही बेरी गांव और आसपास के गांवों का खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और इससे अन्य महिला किसानों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
17 साल की कठोर मेहनत
संतोष देवी की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली। पिछले 17 सालों से वह बंजर और शुष्क जमीन पर प्रयोग कर रही थीं। उन्होंने न केवल अनार, बल्कि सेब और अमरूद की खेती भी पूरी तरह केमिकल-मुक्त (जैविक) तरीके से की। आज उनके खेत में 800 ग्राम तक के अनार और 200 ग्राम के सेब पैदा हो रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि ने उन लोगों के मुंह पर ताला लगा दिया है, जो खेती को घाटे का सौदा मानते थे।
राजस्थान सरकार कर चुकी है सम्मानित
आर्थिक रूप से भी संतोष देवी ने खेती को लाभ का व्यवसाय साबित किया है। उन्होंने बताया कि एक समय उनके पति की आय मात्र 3,000 रुपये थी, जबकि आज वे खेती के जरिए करीब 40,000 रुपये की कमाई कर रही हैं। उनके कार्यों को देखते हुए साल 2016-17 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके बाद संतोष देवी ने पीछे मुडकर नहीं देखा। सफलता की सीढ़ी पर संतोष देवी चढ़ती चली गईं।
बेटी को दहेज में दिए 501 पौधे
उनके द्वारा लगाए गए पेड़ में 770 ग्राम तक के अनार लगे और हिमाचल और जम्मू कश्मीर में उगने वाला 200 ग्राम का सेब राजस्थान में उगाया गया। संतोष देवी ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को दहेज में 501 पौधे दिए, जिससे बगीचा तैयार किया गया है। संतोष देवी ने बताया कि इस उपलब्धि को लेकर परिवार और रिश्तेदार खुश हैं।