
Success Story: हरियाणा के सोनीपत जिले के गांवों में सुबह की शुरुआत कभी अनिश्चितता से होती थी। मिट्टी सूखी है या नहीं, सिंचाई करनी है या नहीं, इसका अंदाजा किसान अनुभव के आधार पर लगाते थे। लेकिन अब यह अंदाजा तकनीक ने बदल दिया है। सिर्फ 17 साल की कक्षा 12 की छात्रा शारन्या मेहता ने एक ऐसा स्मार्ट सिंचाई ऐप बनाया है। इससे किसानों को खेती करना आसान हो गया है। किसानों को पता चल जाता है कि फसल को कब, कितना और कैसे पानी देना है। यह ऐप अब किसानों के लिए “डिसीजन सपोर्ट सिस्टम” की तरह काम कर रहा है।
शारन्या की यह यात्रा किसी लैब से नहीं, बल्कि खेतों से शुरू हुई। बचपन में वह अपने दादा के साथ गांव जाया करती थीं। वहां उन्होंने किसानों की सबसे बड़ी समस्या गलत सिंचाई देखी। कभी जरूरत से ज्यादा पानी तो कभी कम सिंचाई के कारण फसलें खराब हो जाती थीं। कई बार किसान घंटों पंप चलाते, लेकिन मिट्टी में नमी नहीं पहुंचती थी। यही अनुभव उनके दिमाग में सवाल बनकर उभरा—क्या खेती को डेटा और तकनीक से बेहतर बनाया जा सकता है?
शारन्या ने जो ऐप तैयार किया है वह सिर्फ एक साधारण मोबाइल एप्लिकेशन नहीं है, बल्कि एक स्मार्ट डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) है। यह सिस्टम कई तकनीकों को एक साथ जोड़ता है। इसमें मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर लगे हुए हैं। सैटेलाइट डेटा से जुड़ा हुआ है। मौसम पूर्वानुमान की जानकारी मिलती है। किसानों से मिले फीडबैक भी शामिल किए गए हैं। इन सभी इनपुट्स के आधार पर ऐप किसानों को यह सलाह देता है कि उन्हें कब सिंचाई करनी चाहिए और कितनी मात्रा में पानी देना चाहिए।
इस ऐप के इस्तेमाल से किसानों को तुरंत फायदा देखने को मिला।
द बेटर इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, सोनीपत के मंडौरा गांव के किसानों ने बताया कि ऐप की सलाह के अनुसार सिंचाई करने से उनकी फसलें पहले से ज्यादा बेहतर हो गई हैं और फिजूल का खर्च कम हुआ है। एक किसान ने कहा कि ऐप ने उन्हें कई बार सिंचाई करने से रोका, जबकि मिट्टी ऊपर से सूखी लग रही थी। बाद में पता चला कि अंदर नमी पर्याप्त थी। इससे डीजल और पानी दोनों की बचत हुई।
शारन्या का यह इनोवेशन अचानक नहीं बना। उन्होंने कक्षा 9 में ही “Project Jal” नाम से काम शुरू किया था, जिसमें उन्होंने जल संरक्षण और सिंचाई के तरीकों पर प्रयोग किए। उन्होंने चेक डैम, पानी के बहाव और मिट्टी की स्थिति पर अध्ययन किया और धीरे-धीरे अपने आइडिया को एक टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन में बदल दिया। मेंटर्स और एक्सपर्ट्स की मदद से यह प्रोजेक्ट एक फुल-फ्लेज्ड ऐप में विकसित हुआ।
इस ऐप की खास बात यह है कि यह सिर्फ हाई-टेक नहीं, बल्कि किसान-फ्रेंडली भी है। लोकल भाषा में वॉइस अलर्ट भेजा जाता है। ऑफलाइन इस्तेमाल करने की सुविधा भी मिली हुई है। कलर-कोडेड मैप्स बने हुए हैं। इसके फीचर्स ग्रामीणों के लिए काफी उपयोगी हैं।
शारन्या के इस इनोवेशन को पहचान भी मिली है। उन्होंने अपने सिस्टम के लिए प्रोविजनल पेटेंट फाइल किया है और उन्हें इनोवेशन के लिए पुरस्कार भी मिल चुका है। शारन्या की इस मेहनत से पता चलता है कि युवा सोच और तकनीक मिलकर बड़े बदलाव ला सकती है।
भारत में कृषि क्षेत्र देश के जल संसाधनों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करता है। ऐसे में स्मार्ट सिंचाई तकनीक पानी बचाने और खेती को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। शारन्या का यह ऐप न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि जल संकट जैसी बड़ी समस्या का भी समाधान पेश करता है।
स्मार्ट सिंचाई को अपने खेत में एक दिमाग लगाने जैसा समझें। स्मार्ट सिंचाई प्रणालियाँ सेंसर, मौसम की जानकारी और स्मार्टफोन ऐप्स को मिलाकर आपकी फसलों को आवश्यक पानी का सटीक समय और मात्रा निर्धारित करती हैं, जिससे मनमाने शेड्यूल या अनुमान लगाने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।
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