MP के इस शख्स ने कर दिया कमाल, पहले की मजदूरी बाद में बन गया सफल बिजनेसमैन

Success Story: मजदूरी से बिजनेसमैन बनने का सफर मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन का परिणाम होता है। कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश के खंडवा के सीताराम पटेल ने कर दिखाया है। सीताराम पटेल कभी मजदूरी करते थे। फिर छोटी-मोटी नौकरी करने लगे। इससे घर खर्च नहीं चल पा रहा था। आखिरी में सीतारम बिजनेस करने का प्लान बनाया

Jitendra Singh
अपडेटेड25 Dec 2025, 06:10 AM IST
Success Story: मजदूरी करते करते बन गए सफल बिजनेसमैन
Success Story: मजदूरी करते करते बन गए सफल बिजनेसमैन (सांकेतिक तस्वीर)

Success Story: किसी चीज को अगर पाने की ठान लो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती है, इस बात को मध्य प्रदेश के खंडवा के सीताराम पटेल ने पूरा कर दिखाया है। पटेल की जिंदगी बेहद आर्थिक तंगी से गुजरी। कभी मजदूरी कर घर खर्च चला रहे थे। फिर छोटी-मोटी दुकानों में ही नौकरी करने लगे। इससे भी घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन सीताराम के पास कोई विकल्प नहीं थी। कोई बिजनेस शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत थी, जो सीताराम के पास नहीं थी। लेकिन सीताराम के आत्मविश्वास और साहस जरूरत था।

फिर सीताराम ने एक ऐसी रणनीति बनाई। अपने काम में ईमानदार रखा, घरघोर मेहनत की, इसके बाज सीताराम मजदूर से सफल बिजनेसमैन बन गए। इस सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए सीताराम की मां का सबसे बड़ा योगदान रहा। मां के आशीर्वाद से सीताराम का आज कई जिलों में बिजनेस फल-फूल रहा है।

संघर्षों के सागर में डूबे सीताराम

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, सीताराम का बचपन बेदह संघर्ष के साथ गुजरा। परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि घर का खर्च आसानी से चल सके। ऐसे में सीताराम ने पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे कामकाज करना शुरू कर दिया। कभी मजदूरी करते थे तो कभी मेडिकल की दुकान में काम करते थे, जहां उन्हें 150 रुपये महीना मिलते थे। इसी तरह कभी मोबाइल रिपेयर की दुकान में काम करने लगे। मेहनत से सीताराम कभी पीछे नहीं हटे।

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मां के गहनों ने बना दिया बिजनेसमैन

नौकरी से सीताराम को संतोष नहीं मिल रहा था। ऐसे में सीताराम ने बिजनेस करने की ठानी, लेकिन यहां भी पूंजी नहीं थी। ऐसे में सीताराम की मां ने अपने गहने दिए। इन गहनों को बेचकर सीताराम ने मोबाइल रिपेयर का बिजनेस शुरू किया। इसी पूंजी से उन्होंने “श्री दादाजी मोबाइल” और “एचडीएम सेल्स” की नींव रखी। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दौर में सीताराम को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अनुभव कम होने की वजह से उन्हें घाटा भी उठाना पड़ा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि सफलता उनका इंतजार कर रही थी। अपनी मेहनत के दम पर सीताराम का कारोबार धी-धीरे फैलने लगा। आज वे मोबाइल की एजेंसी के साथ-साथ रिटेल व्यापार, बाटा शोरूम, सफल सीट्स और सफल इंडस्ट्रीज के नाम से वेयरहाउस का कारोबार भी कर रहे हैं।

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मध्य प्रदेश के 4 जिलों में फैला कारोबार

रिपोर्ट के मुताबिक, आज सीताराम का बिजनेस खंडवा समेत आसपास के चार जिलों तक फैला हुआ है। मोबाइल एजेंसी से लेकर बीज और वेयरहाउस तक, उनके कई कारोबार एक साथ चल रहे हैं। यह सब कुछ उन्होंने सिर्फ 20 साल के भीतर हासिल किया। सीताराम पहले कभी नौकरी और मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे थे। अब वो बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। सीताराम की कहानी सिर्फ व्यापार की सफलता नहीं, बल्कि सपनों को सच करने का जीता-जागता उदाहरण है।

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