Success Story: भारत के युवाओं की सफलता की कहानियां अक्सर यह साबित करती हैं कि बड़ा सपना देखने और उसे हासिल करने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली 18 साल की तन्वी शर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने पारंपरिक करियर विकल्पों से अलग हटकर ऐसा फैसला लिया, जिसने उन्हें आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया है।
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद तन्वी के सामने भी वही विकल्प थे, जो आमतौर पर विज्ञान वर्ग के छात्रों के सामने होते हैं। वह चाहतीं तो मेडिकल क्षेत्र में जाने के लिए NEET की तैयारी कर सकती थीं या इंजीनियरिंग के लिए JEE का रास्ता चुन सकती थीं। लेकिन उन्होंने एक ऐसा करियर चुना, जो अपेक्षाकृत कम लोग चुनते हैं और जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी अभी सीमित मानी जाती है।
कुछ अलग करने की चाह ने बदली जिंदगी
तन्वी शर्मा का कहना है कि वह हमेशा कुछ अलग करना चाहती थीं। उन्होंने महसूस किया कि यदि उन्हें अपनी पहचान बनानी है तो उन्हें भीड़ से अलग रास्ता चुनना होगा। उनके अनुसार 12वीं के बाद उनके पास कई विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करियर चुनने का फैसला किया जो उन्हें नई चुनौतियां और नई पहचान दे सके।
यही सोच उन्हें मर्चेंट नेवी (Merchant Navy) की ओर ले गई। जानकारों का मानना है कि आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र सीमित करियर विकल्पों तक खुद को सीमित रखते हैं, वहीं ऐसे युवा नए क्षेत्रों में अवसर तलाशकर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
केवल एक महीने की सेल्फ स्टडी
तन्वी की सफलता को खास बनाने वाली बात सिर्फ उनका चयन नहीं, बल्कि उसकी तैयारी का तरीका भी है। उन्होंने मर्चेंट नेवी (Merchant Navy) से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए की। महज एक महीने की तैयारी और मजबूत आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने इंडियन मर्चेंट नेवी की परीक्षा पास कर ली। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कम समय में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
कई शहरों में जाकर दी परीक्षाएं
सफलता का यह सफर आसान नहीं था। तन्वी को परीक्षा और चयन प्रक्रिया के दौरान कई शहरों की यात्रा करनी पड़ी। उन्होंने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और गोवा जैसे शहरों में जाकर विभिन्न चरणों की परीक्षाएं और मूल्यांकन प्रक्रियाएं पूरी कीं। एक छोटे शहर की छात्रा के लिए यह सफर चुनौतियों से भरा था। लेकिन उन्होंने हर कठिनाई का सामना आत्मविश्वास के साथ किया और अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई।
मां को दिया सफलता का श्रेय
हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी का योगदान जरूर होता है। तन्वी शर्मा ने अपनी इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां को दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार का सहयोग और विश्वास उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।