Success Story: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की गिनती पिछड़े इलाकों में की जाती है। आज भी यहां रोजगार के साधन बेहद कम हैं, जिससे लोगों को रोजी रोटी के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। लेकिन अब यहां की युवा पीढ़ी दूसरे राज्यों की नौकरी छोड़कर घर पर ही रहकर बिजनेस करने की तैयारी कर रही हैं। कुछ ऐसे ही झांसी की वेदांती नगरिया ने BBA करके मुंबई में नौकरी करने लगीं। लाखों का पैकेज मिल रहा था। सब कुछ जीवन में ठीक चल रहा था। लेकिन वेदांती को एक टीस थी कि उसे अभी आगे बढ़ना है और फिर नौकरी छोड़कर अपने घर आ गईं। यहां से ही पोषक आहार का बिजनेस शुरू कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेदांती के पिता का अपरा मिल्क ब्रांड का बिजनेस हैं। वेदांती चाहतीं तो इसमें हांथ बंटा सकती थीं। लेकिन उन्होंने अलग रास्ता चुना और वेदांती ने कठिया गेहूं की दलिया और सरसों के तेल का बिजनेस शुरू कर दिया। वेदांती का लक्ष्य है कि ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों से बने प्रोडक्ट को घर-घर पहुंचाना है।
वेदांती से शुरू किया कठिया गेहूं की दलिया का बिजनेस
वेदांती ने पिता के दूध के कारोबार से अलग बिजनेस शुरू किया। उन्होंने प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का स्टार्टअप शुरू किया। वेदांती ने पारंपरिक स्वाद और पौष्टिकता के लिए कठिया गेहूं की दलिया बेचने का कारोबार शुरू किया। इसके साथ ही कोल्ड प्रेस्ड सरसों का तेल भी लॉन्च किया है। वेदांती किसानों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उनके इस स्टार्टअप से स्थानीय किसान और महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
कठिया गेहूं को मिला GI टैग
बता दें कि बुंदेलखंड का कठिया गेहूं पूरी दुनिया में मशहूर है। यह लाल रंग का होता है। इसकी खेती बुंदेलखंड में कई दशकों से हो रही है। हाल ही में बुंदेलखंड के इस गेहूं को GI Tag भी मिला है। ये गेहूं अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। कठिया गेहूं की दलिया स्वादिष्ट के साथ सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। बुंदेलखंड में यह गेहूं हमीरपुर, झांसी, महोबा और ललितपुर में बड़े पैमाने में उगाया जाता है। कमजोर शरीर वालों के लिए ये दलिया बेहद उपयोगी मानी गई। कठिया गेहूं की दलिया को लोग यहां दूध के साथ खाना ज्यादा पसंद करते हैं।