Success Story: साइकिल से पढ़ाई और मेहनत का सफर, बुलंदशहर के विपिन राजौरा ने हासिल की 538वीं रैंक

Success Story: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के डूंगरा जाट गांव के रहने वाले विपिन राजौरा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 538वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि उन्हें बाइक या कार चलाना नहीं आता और वे ज्यादातर काम साइकिल से ही करते हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड11 Mar 2026, 06:06 AM IST
Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 538वीं रैंक हासिल करने वाले बुलंदशहर के डूंगरा जाट गांव के निवासी विपिन राजौरा
Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 538वीं रैंक हासिल करने वाले बुलंदशहर के डूंगरा जाट गांव के निवासी विपिन राजौरा

Success Story: देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा परीक्षा में हर साल लाखों युवा शामिल होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही उम्मीदवार अंतिम सूची तक पहुंच पाते हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के रहने वाले विपिन राजौरा ने अपनी कड़ी मेहनत और धैर्य के दम पर इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए 538वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे जिले में खुशी का माहौल है।

UPSC के नतीजे सामने आने के बाद से ही विपिन राजौरा के गांव में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लोग उनके घर पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं और इस उपलब्धि पर गर्व जता रहे हैं।

बुलंदशहर के डूंगरा जाट गांव के रहने वाले हैं विपिन

विपिन राजौरा बुलंदशहर जिले के जहांगीराबाद क्षेत्र के पास स्थित डूंगरा जाट गांव के निवासी हैं। साधारण परिवार से आने वाले विपिन ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। गांव के लोगों के मुताबिक विपिन बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर थे। वह हमेशा से कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लगातार मेहनत करते रहे। जब UPSC का परिणाम घोषित हुआ और उनका नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में सामने आया, तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर उनकी सफलता का जश्न मनाया।

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सादगी की मिसाल: साइकिल से करते हैं ज्यादातर काम

विपिन राजौरा की सफलता की कहानी का एक दिलचस्प पहलू उनकी सादगी भरी जीवनशैली भी है। बताया जाता है कि उन्हें अभी तक न तो टू-व्हीलर चलाना आता है और न ही फोर-व्हीलर। अपने ज्यादातर काम वे साइकिल से ही निपटाते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि अक्सर उन्हें साइकिल से ही बाजार जाते या किसी काम से आते-जाते देखा जाता था। पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने सादगी को बनाए रखा और अपना पूरा ध्यान तैयारी पर केंद्रित किया। आज जब उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की है, तो उनकी यह सादगी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

अनुशासन और मेहनत से हासिल की सफलता

UPSC सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सफलता पाने के लिए लंबे समय तक लगातार पढ़ाई और धैर्य की जरूरत होती है। विपिन राजौरा ने भी अपनी तैयारी के दौरान अनुशासित दिनचर्या अपनाई। वे रोजाना नियमित रूप से पढ़ाई करते थे और हर विषय को गहराई से समझने की कोशिश करते थे। तैयारी के दौरान उन्होंने समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का भी अध्ययन किया, जिससे परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद मिली। लगातार मेहनत और धैर्य के दम पर आखिरकार उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।

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बुलंदशहर के चार युवाओं ने पास की UPSC परीक्षा

इस बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा में बुलंदशहर जिले के कई युवाओं ने सफलता हासिल की है। जिले की नाबिया परवेज ने 29वीं रैंक, शिखा सिंह ने 113वीं रैंक, विपिन राजौरा ने 538वीं रैंक और पारस भाटिया ने 937वीं रैंक हासिल की है। इन चारों अभ्यर्थियों की सफलता से पूरे जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन युवाओं ने बुलंदशहर का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

परिवार का मिला पूरा सहयोग

विपिन राजौरा की सफलता में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। परिवार के सदस्यों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। परिवार का कहना है कि विपिन हमेशा से अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थे और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे। आज उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है।

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युवाओं के लिए प्रेरणा बनी विपिन की कहानी

विपिन राजौरा की सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। खासकर गांव और छोटे शहरों के छात्रों को उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उनकी कहानी बताती है कि सफलता के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास सभी सुविधाएं हों। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसी भी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। साइकिल से अपने काम करने वाला यह साधारण युवा आज UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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