Success Story: आमतौर पर हर आईटी इंजीनियर का सपना होता है कि पढ़ाई करके अमेरिका में बस जाए। खूब पैसे कमाएं इसके बाद आराम से जिंदगी जाए, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हे भारत की माटी अपनी ओर खींच लाती है। कुछ ऐसे ही तमिलनाडुक के श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) के साथ हुआ। वेम्बू ने आईआईटी मद्रास से पढ़ाई की। फिर पीएचडी करने अमेरिका चले गए। वहीं मोटी सैलरी पर काम भी शुरू कर दिया। इसके बाद उनके विचार बदले और वापस भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने तमिलनाडु के एक गांव में आईटी कंपनी की शुरुआत की। आज यह कंपनी अरबों डॉलर में कारोबार कर रही है।
श्रीधर वेम्बू तमिलनाडु की एक मिडिल क्लास फैमिली में पले बढ़े। तमिल भाषा में प्राइमरी एजुकेशन पूरी की। आईआईटी मद्रास से 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। इसके बाद पीएचडी करने के लिए अमेरिका चले गए थे। यहां उन्होंने सैन डिएगो स्थित क्वालकॉम में नौकरी शुरू की। करीब 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी को अलविदा कह दिया। इसके बाद वे भारत लौट आए।
श्रीघर ने गांव में शुरू किया बिजनेस
श्रीधर जैसे ही अमेरिका से गांव वापस लौट आए तो सब लोग उन्हें समझाने लगे। गांव वालों ने कहा कि यहां कुछ नहीं रखा। आप अमेरिका में ही नौकरी करें, लेकिन श्रीधर वेम्बू तो पहले से ही तय कर चुके थे कि वो गांव से अपना काम शुरू करेंगे। उन्होंने तमिलनाडु के एक छोटे से इलाके तेनकासी को चुना। अपने भाई के साथ मिलकर 1996 में एडवेंटनेट नाम से एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट फर्म की शुरुआत की। साल 2009 में इस कंपनी का नाम बदलकर जोहो कॉरपोरेशन कर दिया गया। यह कंपनी सॉफ्टवेयर सॉल्युशन सर्विस मुहैया कराती है। खास बात यह है कि जोहो का ऑफिस बनने के चलते ही तेनकासी को जिले का दर्जा मिला।
ग्रामीणों को बनाया इंजीनियर
वेम्बू का मकदस था कि ग्रामीण क्षेत्रों में आईटी का विस्तार हो। श्रीधर वेम्बू की इच्छा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली लोग भारत की मुख्य निर्यात आईटी सेवाओं में काम करें। उन्होंने नारियल के खेत में काम करने वाले 40 ग्रामीणों को नौकरी दी। आज जोहो का रेवेन्यू 1 अरब डॉलर पहुंच गया है। इस बड़े मकाम को हासिल करने के बाद भी वेम्बू अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। अरबपति कारोबारी होने के बावजूद वे अक्सर साइकिल चलाते नजर आ जाते हैं।
जोहो के मुरीद हो गए अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि वे Microsoft और Google के प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर के भारतीय विकल्प Zoho का उपयोग करेंगे। उन्होंने Zoho के CEO श्रीधर वेम्बु की सराहना की है। यह Microsoft और Google का भारतीय विकल्प है। वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मैं दस्तावेज, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन के लिए हमारे स्वदेशी प्लेटफार्म Zoho पर जा रहा हूं। मैं सभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी आह्वान में शामिल होने और देशी उत्पादों और सेवाओं को अपनाने का आग्रह करता हूं।
जोहो ने लॉन्च किया Arattai ऐप
भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho ने अपना मैसेजिंग ऐप अरट्टई (Arattai) को लॉन्च कर दिया है। इसके बाद से कंपनी सुर्खियो में आ गई। यह मैसेजिंग ऐप लो इंटरनेट एरिया और सस्ते स्मार्टफोन पर भी आसानी से काम करेगा। इस ऐप का फायदा उन लोगों को भी होगा जो रिमोट एरिया और ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। कंपनी ने दावा किया है कि आने वाले दिनो में इस मैसेजिंग ऐप का मुकाबला WhatsApp से होगा।