
Taranjit Singh Sandhu News: जब आप भारत न्यूजीलैंड वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच देख रहे थे, तो उस बीच देश में कई बड़े तबादले हुए। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को भी रिप्लेस कर दिया गया है। अब दिल्ली के नए उपराज्यपाल पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को बनाया गया है।
भारत के कूटनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं,जिन्होंने वैश्विक मंच पर देश की साख को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इनमें तरनजीत सिंह संधू का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 1988 बैच के अधिकारी रहे संधू ने लगभग 35 वर्षों तक देश की सेवा की। विशेष रूप से भारत और अमेरिका के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' से 'वैश्विक साझेदारी' में बदलने का श्रेय काफी हद तक उन्हें ही जाता है।
तरनजीत सिंह संधू का जन्म 23 जनवरी 1963 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके दादा, तेजा सिंह समुंद्री, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के संस्थापकों में से एक थे। उनके पिता, बिशन सिंह संधू, अमृतसर के प्रतिष्ठित खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल भी थे।
संधू ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक किया और उसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में मास्टर डिग्री हासिल की।साल 1988 में वो देश की सेवा के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय में शामिल हुए। यहां से उनके करियर की शुरुआत हुई और उन्होंने 1990 से 1992 तक कीव में भारतीय दूतावास खोलने में मदद की। उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट उस वक्त आया,जब उन्हें अमेरिका भेजा गया।
उन्होंने भारत-अमेरिका के संबंधों को संवारने में काफी मदद की है। उन्होंने अपने करियर के दौरानपूर्व सोवियत संघ (यूक्रेन) और वाशिंगटन डी.सी. में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो साल 1997 से 2000 तक वाशिंगटन में प्रथम सचिव रहे। ये वहीं साल था, जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था और अमेरिका से तनाव बढ़ रहा था। उस वक्त अपनी कूटनीति और सूझबूझ से उन्होंने भारत का अमेरिकी कांग्रेस से संपर्क करने में मदद की थी। संधू ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
तरनजीत सिंह संधू साल 2020 से 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत थे। उनके कार्यकाल में कोरोना माहामारी आई थी। उस वक्त वैक्सीन मैत्री और चिकित्सा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन और भारतीय प्रवासियों के साथ मिलकर काम किया।उनके कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच 'क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी' (iCET) पर ऐतिहासिक पहल शुरू हुई। जून 2023 में पीएम मोदी की अमेरिका की पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा के सफल आयोजन में संधू की पर्दे के पीछे की मेहनत का बड़ा योगदान था।संधू को अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच बेहद लोकप्रिय माना जाता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत के विकास से जोड़ने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | नए नियुक्त राज्यपाल/उप-राज्यपाल |
|---|---|
| दिल्ली (LG) | तरनजीत सिंह संधू |
| लद्दाख (LG) | विनय कुमार सक्सेना |
| पश्चिम बंगाल | आर.एन. रवि |
| तेलंगाना | शिव प्रताप शुक्ला |
| महाराष्ट्र | जिष्णु देव वर्मा |
| बिहार | ले. जनरल (रि.) सैयद अता हसनैन |
| तमिलनाडु | राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर |
| हिमाचल प्रदेश | कविंदर गुप्ता |
| नागालैंड | नंद किशोर यादव |
जनवरी 2024 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद, संधू ने अपनी पैतृक जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। मार्च 2024 में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। बीजेपी ने उन्हें अमृतसर लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि चुनावी राजनीति उनके लिए नई थी, वे चुनाव नहीं जीत सके।
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