पहली बार नहीं Tata Trusts में अंदरूनी कलह…9 साल पहले भी हुआ था ऐसा ही विवाद

Tata Trusts Battle: टाटा ट्रस्ट्स में बहुमत के दम पर किसी ट्रस्टी को पद से हटाने की घटना पहली बार नहीं हुई है। ऐसा पहले भी हो चुका है। इस दौरान बोर्ड ने साइरस मिस्त्री को पद से हटाया था।  

Shivam Shukla
अपडेटेड29 Oct 2025, 01:39 PM IST
टाटा ट्रस्ट्स विवाद
टाटा ट्रस्ट्स विवाद

Tata Trusts Battle: टाटा ट्रस्ट्स में आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है। ट्रस्ट्स में दो गुट बन चुके हैं। एक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा का गुट और दूसरा रतन टाटा के करीबी सहयोगी मेहली मिस्त्री का। मंगलवार को बहुमत के फैसले ने मेहली मिस्त्री को ट्रस्टी के पद से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह टाटा ट्रस्ट्स के इतिहास में एक बड़ी घटना है, जहां आतंरिक विवाद के चलते किसी ट्रस्टी को बहुमत के साथ पद से हटाया गया हो। हालांकि, मेहली मिस्त्री इस फैसले को कानूनी चुनौती दे सकती है।

नोएल टाटा गुट ने विरोध में दिया वोट

दरअसल, मंगलवार, 28 अक्टूबर को टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड मीटिंग हुई। इस बैठक में चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी विजय सिंह ने मेहली मिस्त्री खिलाफ वोटिंग की। वहीं, डेरियस खंबटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और प्रमीत झावेरी ने सपोर्ट में वोट किया।

सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) का अलग-अलग स्ट्रक्चर के कारण मिस्त्री खुद अपने पुनर्नियुक्ति पर वोट नहीं डाल सके। तीन ट्रस्टियों के विरोध ने दोनों ट्रस्ट्स में बहुमत कायम कर लिया। ये दोनों ट्रस्ट्स मिलकर टाटा सन्स की 51 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं। मिस्त्री को सूचित किया गया कि उनकी पुनर्नियुक्ति का सर्कुलर पास नहीं हुआ और 28 अक्टूबर से उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है।

9 साल पहले भी हुई थी ऐसी घटना

बता दें कि ठीक नौ साल पहले टाटा ट्रस्ट्स में ऐसा विवाद देखने को मिला था। इस दौरान टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को पद से हटाया गया था। विडंबना है कि साइरस मिस्त्री को अक्टूबर 2016 में अंदरूनी विवाद के बाद अचानक पद से हटाया गया था। मिस्त्री ने 2012 में रतन टाटा से पदभार संभाला था और उनकी चार साल से भी कम समय की पारी का अंत टाटा संस के बोर्ड की वोटिंग के जरिए हुआ था। यह फैसला मुख्य शेयरधारक, टाटा ट्रस्ट्स, की तरफ से मिस्त्री में अविश्वास के आधार पर लिया गया था।

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इस वजह से हटाए गए थे साइरस मिस्त्री

साइरस मिस्त्री को पद से हटाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इनमें ग्रुप की कुछ कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन, विवादास्पद फैसलों को संभालने का तरीका (जैसे टाटा नैनो प्रोजेक्ट को बंद करने करने का इरादा और जापान की एनटीटी डोकोमो के साथ विवाद) और मिस्त्री की कार्यशैली को लेकर रतन टाटा और ट्रस्ट्स के दिग्गजों के साथ कथित मतभेद शामिल थे।

टाटा संस ने मिस्त्री को पद से इस्तीफा देने का विकल्प दिया था, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद बोर्ड में वोटिंग हुई। इस घटना ने एक लंबी कानूनी लड़ाई को जन्म दिया, जिससे टाटा ग्रुप और मिस्त्री के शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के बीच गहरा कॉर्पोरेट झगड़ा शुरू हो गया।

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