Tata Trusts Battle: पिछले कई महीनों से टाटा ट्रस्ट्स में चल रहा अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। टाटा सन्स (Tata Sons) में अपनी बड़ी हिस्सेदारी के साथ ग्रुप पर कंट्रोल रखने वाले ट्रस्ट्स में बड़ा उलटफेर होने की संभावना है। रतन टाटा के करीबी सहयोगी मेहली मिस्त्री को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। दरअसल, वेणु श्रीनिवासन, नोएल टाटा और विजय सिंह ने मेहली मिस्त्री की आजीवन पुनर्नियुक्ति बहाल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। हालांकि, मेहली मिस्त्री कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
दोनों ट्रस्ट से हुए बेदखल
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी विजय सिंह की ओर से प्रस्ताव खारिज होने के बाद मेहली मिस्त्री को सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) दोनों में बोर्ड मेंबर के रूप में दोबारा नियुक्ति नहीं मिली। ये दोनों ट्रस्ट मिलकर टाटा सन्स में 51 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं।
मेहली पक्ष मे इन सदस्यों में किया वोट
बता दें कि डेरियस खंबाटा, प्रमीत झावेरी और एच.सी जहांगीर ने मेहली मिस्त्री का समर्थन किया था। मिस्त्री ने अपने लिए वोट नहीं डाल सकते थे। ऐसे में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) में बहुमत से वीटो पास हो गया। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) में भी जिमी टाटा आमतौर पर बैठकों में हिंस्सा नहीं लेते, लिहाजा वहां भी फैसला बहुमत का ही रहा।
खुलकर सामने आया मतभेद
इस वोटिंग के बाद टाटा ट्रस्ट्स में लंबे समय से चल रहा मतभेद खुलकर सामने आ गया है। एक तरफ चेयरमैन नोएल टाटा की अगुवाई वाले ग्रुप है, जबकि दूसरी तरफ मेहली मिस्त्री के समर्थन वाली गुट है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह जंग और तीखी हो सकती है। दरअसल, टाटा ट्रस्ट्स का फैसला सीधे टाटा सन्स की दिशा तय करता है।
9 साल पहले भी टाटा ट्रस्ट्स में हुई थी ऐसी घटना
गौरतलब है कि आज ठीक 9 साल पहले भी यह घटना देखने को मिली थी। इस दौरान साइरस मिस्त्री को ट्रस्ट्स से बाहर निकाला गया था। 24 अक्टूबर 2016 को हुई इस घटना ने कॉर्पोरेट इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया था। फैसले ने देश के सबसे बिजनेस ग्रुप के भीतर गहरे मतभेदों को सबसे सामने ला दिया था।