The Raja Saab review: रिलीज हुई द राजा साब, जानिए कैसा है प्रभास की फिल्म का रिव्यू, डिटेल में जानें

द राजा साब प्रभास की हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें कहानी कमजोर और बिखरी हुई है। 400 करोड़ के बजट के बावजूद फिल्म में न डर है, न हंसी। खराब पटकथा, कमजोर वीएफएक्स और अधूरे किरदार फिल्म को उबाऊ बना देते हैं।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड9 Jan 2026, 03:44 PM IST
The Raja Saab review: रिलीज हुई द राजा साब, जानिए कैसा है प्रभास की फिल्म का रिव्यू, डिटेल में जानें
The Raja Saab review: रिलीज हुई द राजा साब, जानिए कैसा है प्रभास की फिल्म का रिव्यू, डिटेल में जानें

प्रभास की बहुप्रतीक्षित फिल्म द राजा साब एक लापता दादा की तलाश की कहानी है। लेकिन लगभग तीन घंटे की इस फिल्म में दर्शक सिर्फ दादा को ही नहीं, बल्कि मजबूत कहानी, दमदार किरदार, डर और सच्चा मनोरंजन भी ढूंढते रह जाते हैं। फिल्म में साफ दिशा और संतोषजनक अंत की कमी साफ महसूस होती है।

फिल्म की शुरुआत राजा (प्रभास) से होती है, जो अपनी दादी गंगम्मा (जरीना वहाब) के साथ रहता है। गंगम्मा अल्जाइमर की मरीज हैं और उन्हें सिर्फ अपने लापता पति कनकराजू (संजय दत्त) और पोते की याद रहती है। वह राजा से बार-बार अपने दादा को ढूंढने को कहती हैं, जो उन्हें सपनों में दिखते हैं।

यह भी पढ़ें | सड़क हादसे में कमलनाथ सरकार में गृहमंत्री रहे बाला बच्चन की बेटी की मौत

एक सुराग मिलने पर राजा हैदराबाद जाता है। कई रहस्यमयी घटनाओं के बाद वह एक भूतिया महल में पहुंचता है, जो उसके दादा का है। महल का राज क्या है? दादी के सपनों का मतलब क्या है? क्या राजा अपने दादा से मिल पाएगा? इन सवालों को फिल्म बहुत लंबा खींचती है, लेकिन नए या रोचक विचार नहीं दे पाती।

निर्देशक मारुति की यह फिल्म बुनियादी कहानी कहने में कमजोर है। हॉरर-कॉमेडी का आइडिया ठीक लगता है, लेकिन कमजोर पटकथा इसे शोर भरी, बेकार और उबाऊ बना देती है। फिल्म में भूत-प्रेत, झाड़-फूंक, हिप्नोसिस और तांत्रिक क्रियाएं सब कुछ ठूंस दी गई हैं, जिससे कहानी बिखर जाती है।

यह भी पढ़ें | इसे हफ्ते OTT पर रिलीज हो रहीं ये बेहतरीन वेब सीरीज और वेब सीरीज, आप भी देखें

कहानी कभी गांव, कभी हैदराबाद और कभी उसके आसपास बिना किसी ठोस वजह के घूमती रहती है। प्रभास का किरदार नेकदिल और मजाकिया है, लेकिन उसमें गहराई नहीं है। उसके माता-पिता का क्या हुआ, वह दादी के साथ क्यों रहता है—इन सवालों के जवाब नहीं मिलते।

भूतिया महल में डर के बीच भी किरदार पार्टी करते हैं, सजे-धजे कपड़ों में नजर आते हैं, जो कहानी को मजाक बना देता है। कमजोर वीएफएक्स, साफ दिखने वाला ग्रीन स्क्रीन और प्रभास पर जरूरत से ज्यादा इफेक्ट्स फिल्म को और खराब बनाते हैं। 400 करोड़ रुपये के बजट के हिसाब से नतीजा बेहद निराशाजनक है।

यह भी पढ़ें | इस लोहड़ी घर पर बनाएं गजक, तिल चिक्की और रेवड़ी, सुपर सिंपल हैं तीनों की रेसिपीज

हिप्नोसिस और एक्सॉर्सिज़्म जैसे विषयों में थोड़ी संभावना दिखती है, लेकिन उन्हें ठीक से दिखाया नहीं गया। प्रभास की कॉमिक टाइमिंग कुछ दृश्यों में अच्छी है, खासकर अस्पताल वाला सीन। लेकिन ऐसे पल बहुत कम हैं।

मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार को सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया गया; वे सिर्फ सजावटी किरदार बनकर रह जाती हैं। खराब एडिटिंग भी कहानी की कमजोरियों को उजागर करती है।

कुल मिलाकर, द राजा साब अपना भारी बजट बिखरी हुई कहानी में बर्बाद कर देती है। प्रभास के कुछ मजेदार पलों के बावजूद, फिल्म में गहराई, तालमेल और मजबूत कहानी की कमी है। जो एक मजेदार हॉरर-कॉमेडी बन सकती थी, वह एक उबाऊ और बेस्वाद तीन घंटे की फिल्म बनकर रह जाती है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सThe Raja Saab review: रिलीज हुई द राजा साब, जानिए कैसा है प्रभास की फिल्म का रिव्यू, डिटेल में जानें
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सThe Raja Saab review: रिलीज हुई द राजा साब, जानिए कैसा है प्रभास की फिल्म का रिव्यू, डिटेल में जानें