चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू हो गया है। यह समय धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूतक के दौरान मंदिर आमतौर पर बंद रहते हैं और लोग ग्रहण समाप्त होने तक कुछ नियमों का पालन करते हैं। यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया, आंशिक और पूर्ण चरणों में दिखाई देगा, जिससे आसमान में अलग-अलग दृश्य देखने को मिलेंगे।
सूतक काल लगने के बाद घरों और मंदिरों में तैयारी शुरू हो गई है। इस दौरान लोग शुभ और मांगलिक कार्यों से बचते हैं। कई लोग ग्रहण खत्म होने के बाद ही पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहण की स्पष्टता अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम और आसमान की स्थिति पर निर्भर करेगी। सुरक्षित तरीके से ग्रहण देखने की भी सलाह दी गई है।
सूतक काल कब शुरू हुआ?
चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इसी हिसाब से 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे सूतक काल शुरू हो गया। यह ग्रहण समाप्त होने तक जारी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय कुछ कार्यों पर रोक रहती है और विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
भारत में चंद्र ग्रहण कब दिखाई देगा?
3 मार्च को भारत में चंद्रमा का उदय लगभग शाम 6:26 बजे होगा। इसके बाद ग्रहण दिखाई देना शुरू हो सकता है। अनुमान है कि यह ग्रहण शाम 6:26 बजे से लगभग 6:46 बजे तक देखा जा सकेगा। समय और दृश्यता स्थान और मौसम के अनुसार थोड़ी बदल सकती है।
भारत के किन शहरों में दिखेगा ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पटना, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, इम्फाल, शिलांग, कोहिमा और ईटानगर जैसे शहरों में देखा जा सकेगा। हालांकि, साफ मौसम होने पर ही ग्रहण साफ दिखाई देगा।
दुनिया में कहां-कहां दिखेगा ग्रहण?
साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत के अलावा एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा। अलग-अलग जगहों पर इसकी दृश्यता और अवधि अलग हो सकती है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण क्या होता है?
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में चला जाता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है। इसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है। यह लाल रंग पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरकर आने वाली सूर्य की किरणों के कारण दिखता है।