UPI Toll Payment Fraud: देशभर के हाईवे पर टोल प्लाजा पर यात्रियों को UPI भुगतान के नाम पर दोगुना-तिगुना शुल्क वसूलने की शिकायतें बढ़ रही हैं। टोलकर्मी कैश पेमेंट पर निर्धारित टोल शुल्क लेते हैं, लेकिन UPI या डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त कमीशन या 'सर्विस चार्ज' जोड़ देते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने साफ किया है कि UPI सहित सभी डिजिटल पेमेंट्स पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जा सकता। अगर ऐसा होता है, तो तुरंत शिकायत दर्ज करें।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, टोल शुल्क FASTag या अन्य पेमेंट मोड पर एक समान होता है। UPI पेमेंट पर कोई 'ट्रांजेक्शन फीस' या दोगुना चार्ज वैध नहीं। उदाहरण के लिए, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सामान्य कार का टोल ₹50 है, लेकिन UPI पर कर्मी ₹100 मांगते पकड़े गए। इसी तरह, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों के साथ ऐसी धांधली आम हो गई है। NHAI ने 2025 में ही दिशानिर्देश जारी किए थे कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जीरो सर्विस चार्ज अनिवार्य है।
नियम क्या कहते हैं?
नेशनल हाईवे टोल मैनेजमेंट प्रैक्टिस गाइडलाइंस के तहत टोल शुल्क केवल NHAI पोर्टल या ऐप पर निर्धारित दरों के अनुसार वसूला जा सकता है। सभी टोल पर FASTag अनिवार्य है, लेकिन अगर कोईभुगतान यूपीआई के माध्यम से कर रहा है, तो नियमानुसार केवल टोल राशि का 1.25 गुना ही देना होगा।अगर कर्मी दोगुना मांगें, तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (धोखाधड़ी) के तहत क्राइम है।
कैसे करें शिकायत?
- टोलकर्मी का नाम, प्लाजा आईडी और रसीद नोट करें। UPI ऐप का स्क्रीनशॉट लें।
- राज्य सड़क विभाग के ऐप पर शिकायत दर्ज करें।
- स्थानीय थाने या 112 पर रिपोर्ट करें।
पिछले साल NHAI ने 50,000 से ज्यादा शिकायतों पर कार्रवाई की, जिसमें टोल संचालकों पर ₹10 लाख तक जुर्माना लगा।