प्रोटीन से जुड़े 5 ऐसे मिथक जिन पर आप अब भी करते हैं विश्वास, रणबीर कपूर के फिटनेस ट्रेनर ने दूर किया भ्रम

प्रोटीन को लेकर कई गलतफहमियां हैं। यह न तो अपने-आप शरीर को भारी बनाता है, न सिर्फ जिम जाने वालों के लिए है। भारतीय और शाकाहारी भोजन से भी पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है। स्वस्थ लोगों के लिए सही मात्रा में प्रोटीन सुरक्षित और जरूरी है।

Manali Rastogi
अपडेटेड15 Jan 2026, 02:20 PM IST
प्रोटीन से जुड़े 5 ऐसे मिथक जिन पर आप अब भी करते हैं विश्वास, रणबीर कपूर के फिटनेस ट्रेनर ने दूर किया भ्रम
प्रोटीन से जुड़े 5 ऐसे मिथक जिन पर आप अब भी करते हैं विश्वास, रणबीर कपूर के फिटनेस ट्रेनर ने दूर किया भ्रम

प्रोटीन को लेकर लोगों में कई गलत धारणाएं हैं। बहुत से लोग इसे सिर्फ बॉडीबिल्डरों से जोड़ते हैं या मानते हैं कि ज़्यादा प्रोटीन खाने से शरीर तुरंत बहुत भारी-भरकम हो जाएगा। लेकिन मशहूर फिटनेस कोच शिवोहम, जिन्होंने रणबीर कपूर और आमिर खान जैसे सितारों को ट्रेन किया है, कहते हैं कि प्रोटीन को लेकर जो बातें हम सुनते आए हैं, उनमें से ज़्यादातर गलत हैं।

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MensXP को दिए एक खुले इंटरव्यू में शिवोहम ने भारत में खासकर सोशल मीडिया और जिम कल्चर में फैली प्रोटीन से जुड़ी 5 आम मिथकों को साफ किया।

मिथक 1: प्रोटीन खाने से शरीर बहुत भारी (बल्की) हो जाता है

यह सबसे आम सोच है। शिवोहम बताते हैं कि सिर्फ प्रोटीन खाने से शरीर अपने-आप बहुत मस्कुलर नहीं हो जाता। मांसपेशियां बढ़ाने के लिए ज़्यादा कैलोरी, सही स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और खास लक्ष्य ज़रूरी होते हैं। प्रोटीन का काम मुख्य रूप से मसल्स की मरम्मत और उन्हें स्वस्थ रखना है, न कि आपको बॉडीबिल्डर बना देना।

मिथक 2: भारतीय खाना पहले से ही पर्याप्त प्रोटीन देता है

दाल, चना, दूध और दही जैसे भारतीय खाद्य पदार्थों में प्रोटीन होता है, लेकिन शिवोहम कहते हैं कि मात्रा और सही योजना बहुत ज़रूरी है। ज़्यादातर लोग उतनी मात्रा में प्रोटीन नहीं लेते, जितनी उनके शरीर को चाहिए, खासकर अगर वे फिटनेस, वजन घटाने या मसल्स बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।

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मिथक 3: प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वालों के लिए है

यह सोच प्रोटीन को सिर्फ “जिम ब्रोज़” तक सीमित कर देती है। सच यह है कि प्रोटीन हर किसी के लिए जरूरी है चाहे आप ऑफिस में काम करते हों, योग करते हों, दौड़ते हों या घर संभालते हों। प्रोटीन शरीर की मरम्मत, हार्मोन संतुलन, त्वचा-बालों की सेहत और इम्यून सिस्टम के लिए अहम है।

मिथक 4: शाकाहारी लोगों को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल सकता

शाकाहारियों से अक्सर पूछा जाता है, “प्रोटीन कहां से लेते हो?” शिवोहम इसे पूरी तरह गलत मानते हैं। पनीर, टोफू, स्प्राउट्स, क्विनोआ और अच्छे सप्लीमेंट्स से शाकाहारी लोग भी भरपूर प्रोटीन ले सकते हैं। अलग-अलग पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को मिलाकर पूरा पोषण आसानी से पाया जा सकता है।

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मिथक 5: ज़्यादा प्रोटीन लिवर या किडनी को नुकसान पहुंचाता है

यह डर बहुत लोगों को प्रोटीन बढ़ाने से रोकता है। शिवोहम कहते हैं कि स्वस्थ लोगों में ज़्यादा प्रोटीन खाने से लिवर या किडनी खराब होने का कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है। हां, अगर किसी को पहले से कोई बीमारी है, तो डाइट बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। प्रोटीन कोई डरने वाली चीज़ नहीं है। सही मात्रा और सही जानकारी के साथ, यह हर उम्र और हर लाइफस्टाइल के लोगों के लिए फायदेमंद है।

(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)

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