नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दहकता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के खिलाफ होर्मुज जलडमरूमध्य में दोबारा नौसैनिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह प्रतिबंध केवल ईरान और उसके साथ ट्रेड करने वाले जहाजों पर लागू होगा, जबकि अन्य देशों के कॉमर्शियल जहाजों को वहां से गुजरने की पूरी आजादी रहेगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति के निर्देश पर लगातार तीसरी रात भी ईरान के कई ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं।
1 महीने में ध्वस्त हुई ईरानी नेवी
एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने पिछले 4 महीनों में ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से घुटनों पर ला दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी एक महीने के भीतर खत्म हो गई और उसकी एयरफोर्स अब न के बराबर बची है। इसके अलावा, ईरान की ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को 92% और मिसाइल प्रोडक्शन कैपिसिटी को 89% तक बर्बाद कर दिया गया है। राष्ट्रपति का कहना है कि दोनों देशों के बीच दो दिन पहले एक समझौता होने वाला था, लेकिन ईरान ने आखिरी वक्त पर शर्तों को बदलने की कोशिश की, जिसकी वजह से यह बातचीत टूट गई।
20% सिक्योरिटी टैरिफ का ऐलान
इस बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ने की आशंका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग में सुरक्षा देने के बदले अमेरिका वहां से गुजरने वाले कार्गो जहाजों से 20 प्रतिशत का सिक्योरिटी टैरिफ वसूलेगा। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है, ऐसे में आने वाले समय में कच्चा तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी
बता दें कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी है कि 14 जुलाई की शाम 4 बजे (ET) से ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले समुद्री यातायात की घेराबंदी शुरू कर दी जाएगी। सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान को कॉर्गो जहाजों को निशाना बनाने से रोकना है। इससे पहले 13 अप्रैल से 18 जून के बीच लगाए गए प्रतिबंध के दौरान अमेरिकी नौसेना ने 140 से ज्यादा जहाजों को डायवर्जन दिया था, जबकि 9 जहाजों को निष्क्रिय किया था। इस तनाव के बीच ईरान ने भी अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफघरी ने कहा कि तेहरान किसी भी कीमत पर अपनी समुद्री सीमाओं में अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। किसी भी अनधिकृत सैन्य गतिविधि का करारा जवाब दिया जाएगा।