Trump Tariffs on Drugs: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अमेरिका से दुनिया के फार्मास्युटिकल बाजार को हिला देने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेटेंट दवाओं पर ट्रैरिफ बढ़ाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को विदेशी ब्रांडेड दवाओं के इंपोर्ट पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस कदम का मकसद अमेरिका में दवाओं की आसमान छूती कीमतों को कम करना और देश के भीतर ही दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में अब विदेशी कंपनियों के लिए अमेरिका में महंगी दवाएं बेचना कठिन हो गया है।
ब्रांडेड दवाओं पर देना होगा 100% टैरिफ
इस नए आदेश के तहत, अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली तमाम ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ देना होगा। लेकिन ट्रंप के इस फैसले को मैन्युफैक्चर मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप प्रशासन की तरफ से साफ कहा गया है कि अगर दवा कंपनियां टैरिफ से बचना चाहती हैं, तो उन्हें या तो अपनी प्रोडक्शन यूनिट अमेरिका में शिफ्ट करनी होंगी या फिर सरकार के साथ एक स्पेशल 'प्राइसिंग एग्रीमेंट' करना होगा। इस पॉलिसी खास तौर पर उन पेटेंट वाली दवाओं को झटका लगेगा, जो विदेशों में बनती हैं और अमेरिका में दूसरे विकसित देशों के मुकाबले ज्यादा ऊंचे दामों पर बेची जाती हैं।
कंपनियों को मिला अल्टीमेटम
ट्रंप ने इस नई पॉलिसी को लागू करने के लिए 120 दिनों की डेडलाइन भी तय कर दी है। इस डेडलाइन के तहत, जो कंपनियां टैरिफ बचाना चाहती हैं, उन्हें 120 दिनों के भीतर अपनी कार्ययोजना पेश करनी होगी। वहीं, छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियों को थोड़ी राहत देते हुए 180 दिनों की मोहलत दी गई है।
इन कंपनियों पर लगेगा कम टैक्स
वहीं, अगर कोई दवा कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका में ट्रांसफर करने का दावा करती है, तो उसे 100% टैरिफ के बयाज केवल 20% का ही टैक्स देना होगा। खासबात यह है कि ट्रंप सरकार ने मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) प्राइसिंग फॉर्मूला भी पेश किया है। इसके तहत अगर कंपनियां हेल्थ डिपॉर्टमेंट के साथ समझौता करती हैं, तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें अन्य विकसित देशों के बराबर लानी होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 17 बड़ी कंपनियां सरकार के साथ बातचीत कर रही है, जिनमें से 13 के साथ डील फाइनल भी हो चुका है। बता दें कि इस जनरिक दवाओं को इस टैरिफ पॉलिसी में नहीं शामिल किया गया है। अमेरिका में बिकने वाली वाली कुल दवाओं में 90% से ज्यादा जेनरिक दवाओं की हिस्सेदारी है।