Tulsi Vivah Aarti: घर में होगा सुख-समृद्धि का वास… तुलसी विवाह पर जरूर पढ़ें तुलसी माता की आरती

Tulsi Mata Aarti: कल 2 नवंबर को तुलसी विवाह है, जिसमें तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विवाह होता है। इस दिन पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस खास मौके पर तुलसी माता की आरती जरूर पढ़ें और तुलसी को चुनरी चढ़ाएं।

Priya Shandilya, Livemint
अपडेटेड1 Nov 2025, 07:04 PM IST
तुलसी विवाह पर जरूर पढ़ें तुलसी माता की आरती
तुलसी विवाह पर जरूर पढ़ें तुलसी माता की आरती

Tulsi Mata Aarti: तुलसी का पौधा सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का रक्षक भी माना जाता है। कहा जाता है कि जहां तुलसी होती है, वहां नकारात्मकता टिक नहीं पाती और माहौल हमेशा शांत बना रहता है। भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं, इसलिए हर पूजा में तुलसी पत्र का विशेष स्थान होता है।

कल 2 नवंबर को तुलसी विवाह है। यह एक पवित्र परंपरा है जिसमें तुलसी माता और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से घर में सुख, समृद्धि और वैवाहिक सौभाग्य बढ़ता है। जो लोग श्रद्धा से यह विवाह करते हैं, उनके जीवन में दुख और भय दूर होते हैं। इस पावन अवसर पर तुलसी माता की आरती जरूर पढ़ें।

तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti Lyrics)

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता ।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर ।

रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या ।

विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित ।

पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में ।

मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी ।

प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता ॥

हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता ॥

॥ जय तुलसी माता...॥

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता ।

सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता ॥

तुलसी महारानी की आरती - 2 (Tulsi Ji Ki Aarti)

तुलसी महारानी नमो-नमो,

हरि की पटरानी नमो-नमो ।

धन तुलसी पूरण तप कीनो,

शालिग्राम बनी पटरानी ।

जाके पत्र मंजरी कोमल,

श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥

तुलसी महारानी नमो-नमो,

हरि की पटरानी नमो-नमो ।

धूप-दीप-नैवैद्य आरती,

पुष्पन की वर्षा बरसानी ।

छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,

बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥

तुलसी महारानी नमो-नमो,

हरि की पटरानी नमो-नमो ।

सभी सखी मैया तेरो यश गावें,

भक्तिदान दीजै महारानी ।

नमो-नमो तुलसी महारानी,

तुलसी महारानी नमो-नमो ॥

तुलसी महारानी नमो-नमो,

हरि की पटरानी नमो-नमो ।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

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