हर दिन QR कोड से करते हैं पेमेंट, लेकिन क्या जानते हैं UPI के पीछे कैसे काम करती है पूरी व्यवस्था?

यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बना दिया है। क्यूआर कोड स्कैन कर लोग कुछ ही सेकंड में पैसे भेज सकते हैं। फिलहाल ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त है। नए कानून के बाद भविष्य में व्यापारियों से एमडीआर लिया जा सकता है, लेकिन ग्राहकों पर शुल्क लगाने की बात नहीं है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड1 Sep 2026, 10:28 AM IST
UPI app
UPI app

भारत में पैसे भेजने और भुगतान करने के तरीके को एकीकृत भुगतान प्रणाली यानी यूपीआई ने पूरी तरह बदल दिया है। चाहे सब्जी वाले को पैसे देने हों, रेस्तरां का बिल बांटना हो या बिजली का बिल भरना हो, यूपीआई आज देश में डिजिटल भुगतान का सबसे पसंदीदा तरीका बन चुका है। हर महीने अरबों लेनदेन होने के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी तत्काल भुगतान प्रणालियों में शामिल हो गया है।

हालांकि, हाल ही में संसद से कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद यूपीआई को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। इस कानून के जरिए सरकार को भविष्य में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लेनदेन पर व्यापारी छूट दर यानी एमडीआर की व्यवस्था तय करने का अधिकार मिल गया है।

इसके बाद यह चिंता सामने आई कि क्या अब यूपीआई से भुगतान करना मुफ्त नहीं रहेगा। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि ग्राहकों से भुगतान करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

यूपीआई क्या है और यह कैसे काम करता है?

यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की ओर से विकसित की गई तत्काल भुगतान प्रणाली है। इसके जरिए मोबाइल फोन की मदद से एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेजे जा सकते हैं। इसके लिए हर बार बैंक खाते की पूरी जानकारी दर्ज करने की जरूरत नहीं होती।

यूपीआई से भुगतान करने के लिए यूपीआई पहचान, क्यूआर कोड या पंजीकृत मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। रविवार, छुट्टी या त्योहार के दिन भी इसके जरिए पैसे भेजे जा सकते हैं। एक ही यूपीआई ऐप में कई बैंक खातों को जोड़ा जा सकता है।

गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और भीम जैसे लोकप्रिय भुगतान ऐप यूपीआई व्यवस्था पर काम करते हैं। इनकी मदद से लोग सीधे एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसे भेज सकते हैं।

क्या यूपीआई से भुगतान करना सच में मुफ्त है?

हां, ज्यादातर लोगों के लिए यूपीआई से भुगतान करना अभी मुफ्त है। अगर आप अपने बैंक खाते से सीधे यूपीआई के जरिए भुगतान करते हैं, तो आपको किसी तरह का लेनदेन शुल्क नहीं देना पड़ता।

यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले दुकानदारों से भी व्यापारी छूट दर नहीं ली जाती है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2020 में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लेनदेन पर यह शुल्क हटा दिया था।

फिर यूपीआई शुल्क को लेकर चर्चा क्यों हो रही है?

ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल मुफ्त है, लेकिन पूरी भुगतान व्यवस्था को चलाने में काफी खर्च होता है। बैंक, भुगतान सेवा देने वाली कंपनियां और वित्तीय तकनीक से जुड़ी कंपनियां सर्वर चलाने, साइबर सुरक्षा बनाए रखने, लेनदेन को पूरा करने और तकनीक को बेहतर बनाने पर बड़ी रकम खर्च करती हैं।

व्यापारी छूट दर हटाए जाने के बाद इन खर्चों का बड़ा हिस्सा उद्योग से जुड़ी कंपनियां खुद उठा रही हैं। वहीं, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता दी जाती है।

यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कई बैंक और उद्योग संगठन मानते हैं कि इस व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने के लिए कमाई का एक स्थायी तरीका होना चाहिए।

उनका कहना है कि व्यापारियों से सीमित शुल्क लिया जाए तो भुगतान व्यवस्था को बनाए रखने और उसके बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इससे आम ग्राहकों पर सीधे कोई बोझ नहीं पड़ेगा।

वहीं, कुछ विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि यूपीआई भारत के सार्वजनिक डिजिटल ढांचे का एक अहम हिस्सा है। इसलिए इसे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से समर्थन मिलना चाहिए। उनके अनुसार, किसी तरह का शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिश पर असर पड़ सकता है।

नए कानून का यूपीआई पर क्या असर होगा?

नए संशोधन कानून में तुरंत यूपीआई पर कोई शुल्क लागू नहीं किया गया है। इसके बजाय सरकार को भविष्य में जरूरत पड़ने पर व्यापारी छूट दर की व्यवस्था तय करने का अधिकार दिया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि ग्राहक आगे भी यूपीआई के जरिए मुफ्त में भुगतान कर सकेंगे। अगर भविष्य में व्यापारी छूट दर लागू की जाती है, तो उसका भुगतान व्यापारियों की ओर से किया जाएगा, ग्राहकों की ओर से नहीं।

क्या यूपीआई इस्तेमाल करने वालों को चिंता करनी चाहिए?

फिलहाल यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। आज भी बैंक खाते से सीधे यूपीआई भुगतान करने पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है और इसके इस्तेमाल के तरीके में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

भविष्य में यूपीआई व्यवस्था को चलाने का खर्च कौन उठाएगा, इस पर चर्चा जारी रह सकती है। अगर आगे चलकर कोई शुल्क व्यवस्था लागू होती भी है, तो उसका मुख्य असर व्यापारियों पर होने की उम्मीद है। आम लोगों से यूपीआई भुगतान के लिए सीधे शुल्क लेने की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।

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