Trump Modi Tariff Talks: रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच तनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अमेरिकी संसद के सीनेट ने एक नया बिल पास किया है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस लिस्ट में भारत और चीन जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इस नए घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका के इस कड़े रुख का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। हालांकि, इस गंभीर स्थिति के बीच वाशिंगटन से एक राहत भरा संकेत भी आया है।
मोदी-ट्रंप खुद सुलझाएंगे ट्रैफिक का मसला
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस पूरे विवाद पर अमेरिकी रुख साफ किया है। उन्होंने एक विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत पर संभावित नए टैरिफ का मामला दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही तय होगा। नवारो के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहतरीन कामकाजी संबंध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस मुद्दे का समाधान आपस में मिलकर निकाल लेंगे। किसी भी अन्य अधिकारी या डेलीगेशन को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। इस बयान से यह उम्मीद जगी है कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस टैरिफ के दबाव को कम किया जा सकता है।
क्या है लिंडसे ग्राहम बिल?
अमेरिकी सीनेट में पिछले सप्ताह 86-11 के भारी बहुमत से पारित हुआ। यह बिल दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर आधारित है। 'लिंडसे ग्राहम बिल' का मुख्य उद्देश्य रूस के रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक नुकसान पहुंचाना है। यह कानून रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों को निशाना बनाता है। हालांकि, इसमें उन देशों को छूट देने का भी प्रावधान है, जो रूस से 15 प्रतिशत से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और अपनी निर्भरता घटा रहे हैं। इस विधेयक को कानून बनने के लिए अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से पारित होना बाकी है। अगर यह कानून लागू होता है, तो अंतिम टैरिफ दरें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर तय करेंगे।