US Iran War: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। यह टकराव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध को लेकर हुआ है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समुद्री रास्ता खुला है, लेकिन इस पर पूरी तरह से अमरीकी नेवी का कंट्रोल है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ने वहां नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है और अब केवल उन्हीं जहाजों को आवाजाही की अनुमति दी जा रही है, जिन्हें वाशिंगटन सही समझता है। ट्रंप के इस बयान ने ग्लोबल लेवल पर अनिश्चिचतता को बढ़ा दिया है।
दोनों देशों के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
यह पूरा घटनाक्रम ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से अमेरिका की शर्तें नहीं मानने के बाद सामने आया है। ईरान ने कहा कि हम अमेरिका की शर्तों से सहमत नहीं है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रही रहेगा। हालांकि, मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान की चेतावनी को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि अमरीका के पास इस सैन्य संघर्ष को और अधिक बड़े पैमाने पर ले जाने की पूरी क्षमता है।
युद्ध के आर्थिक नुकासन का हिसाब-किताब शुरू
दरअसल, बात केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच आर्थिक नुकसान का हिसाब-किताब भी शुरू हो गया है। हाल ही में ईरान ने बीते पांच महीनों के सैन्य संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए वार रिपेयरेशन्स की मांग की थी। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आने वाले समय में किसी भी शांति समझौते के दौरान अमेरिका भी ईरान से भारी मुआवजे का दावा करेगा। ट्रंप के अनुसार, बीते कई दशकों के दौरान ईरानी गतिविधियों, रोडसाइड बमों और अन्य हिंसक संघर्षों में मारे गए और घायल हुए अमरीकी नागरिकों के परिजनों के लिए ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई का एक अहम समुद्री रास्ता माना जाता है। यहां से वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सीधा असर देखने को मिलता है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है, तो तेजी से कच्चा तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है।