
Customised Baby: अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क के सबवे में लगे विज्ञापनों ने इन दिनों एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी फर्टिलिटी स्टार्टअप न्यूक्लियस जिनोमिक्स ने माता-पिता को अपने भविष्य के बच्चे को 'आनुवंशिक रूप से ऑप्टिमाइज' करने का खुला न्योता दिया है। कंपनी का विज्ञापन कहता है, 'Have Your Best Baby' यानी 'अपना सर्वश्रेष्ठ बच्चा पाएं'। यह ऑफर उन दंपतियों के लिए है जो इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
इस अभूतपूर्व सुविधा के लिए दंपतियों को लगभग 8 लाख रुपये (8,999 डॉलर) खर्च करने होंगे। इस पैकेज में 20 भ्रूणों तक की पूरी DNA सीक्वेंसिंग शामिल है। कंपनी न केवल बच्चे को वंशानुगत रोगों या कैंसर के जोखिम जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के लिए स्कैन करती है, बल्कि यह आंखों और बालों के रंग जैसे शारीरिक लक्षणों के साथ-साथ लंबाई और बुद्धिमत्ता जैसे जटिल लक्षणों का भी 'पूर्वानुमान' लगाती है। कंपनी का दावा है कि वह 2,000 से अधिक आनुवंशिक विश्लेषण (Genetic analysis) के आधार पर निष्कर्ष निकालती है।
भले ही इस पहल पर सोशल मीडिया और नैतिक हलकों में आलोचना हो रही हो, लेकिन माता-पिता की दिलचस्पी कम नहीं हुई है। कंपनी के संस्थापक 25 वर्षीय किआन सादेघी के अनुसार, 14 नवंबर को विज्ञापन शुरू होने के बाद से उनकी बिक्री में 1,700% की चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि अपने बच्चे के भविष्य को 'नियंत्रित' करने का यह सपना बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर रहा है।
भ्रूण की स्क्रीनिंग आईवीएफ प्रोसेस में रोगों के लिए मानक है, लेकिन न्यूक्लियस जिनोमिक्स जैसी फर्में सामान्य लक्षणों या बीमारियों के लिए भी 'पसंद' का विकल्प दे रही हैं। यह कदम कई लोगों को चिंता में डाल रहा है।
अमेरिकी व्यवहार आनुवंशिकीविद (Behavioral geneticists) एरिक टर्कहाइमर ने इन फर्मों को 'नई यूजेनिक्स कंपनियां' बताया है। हालांकि, संस्थापक सादेघी इस विचार से असहमत हैं। उनका कहना है कि 'सर्वश्रेष्ठ' का मतलब है इस उन्नत विज्ञान का उपयोग करके रोग के जोखिम को कम करना, और अगर लोग चाहें तो बच्चे की लंबाई जैसी चीजों का अनुमान लगाना।
जेनेटिक्स विशेषज्ञों का सबसे बड़ा सवाल नैतिकता से ज्यादा विज्ञान की सटीकता पर है। दिल की बीमारी, उच्च रक्तचाप, या बुद्धिमत्ता जैसे जटिल लक्षण केवल एक या दो नहीं, बल्कि सैकड़ों जीनों के मेल से तय होते हैं। लाइफस्टाइल और पर्यावरण जैसे कारक भी अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंपनी जो दे रही है, वह 'पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर' है, जो बताता है कि बड़े पैमाने पर जीनों के संयोजन से बड़े समूहों में किसी लक्षण की क्या संभावना है।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स एंड जीनोमिक्स ने पिछले साल निष्कर्ष निकाला था कि पॉलीजेनिक स्क्रीनिंग का अभी तक कोई सिद्ध नैदानिक लाभ नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी शायद माता-पिता को 'पसंद का भ्रम' (Illusion of Choice) बेच रही है। हालांकि, संस्थापक सादेघी जोर देते हैं कि वे मरीजों को स्पष्ट बताते हैं कि ये परिणाम 'संभावित' होते हैं और 'कोई नहीं चाहता कि DNA ही एकमात्र भाग्य हो।'
न्यूक्लियस जिनोमिक्स को पीटर थिएल जैसे सिलिकॉन वैली के दिग्गजों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने सादेघी के स्टार्टअप में अपने 'फाउंडर्स फंड' के माध्यम से निवेश किया है। एलन मस्क जैसे टेक पायनियर भी 'प्रोनेटलिस्ट' आंदोलन के समर्थक हैं। यह समूह जनसंख्या के सिकुड़ने की चिंता करता है और चाहता है कि भविष्य की संतानें अधिक बुद्धिमान और लंबी उम्र वाली हों। बड़े टेक इन्वेस्टमेंट, विशाल जीनोमिक डेटा और कम नियमन का मेल 'डिजाइनर बेबी' के युग के आगमन की झलक दे रहा है, और इसके साथ ही गहन नैतिक प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं।
इस बीच, वैज्ञानिक दूसरी दिशा में भी बड़ी प्रगति कर रहे हैं। जून में दुनिया की सबसे बड़ी मेडिकल चैरिटी वेलकम ट्रस्ट ने स्क्रैच से मानव डीएनए बनाने के लिए 117 करोड़ रुपये (10 मिलियन पाउंड) का दान दिया। ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक एक पूरी तरह से सिंथेटिक ह्यूमन क्रोमोसोम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका अंतिम लक्ष्य एक दिन पूरा डीएनए स्क्रैच से बनाना हो सकता है। कैम्ब्रिज के डॉ. जूलियन सेल कहते हैं, 'आसमान ही सीमा है। हम ऐसी थेरेपी की तलाश कर रहे हैं जो लोगों के बुढ़ापे में जीवन को बेहतर बनाएगी, और बीमारियों को कम करेगी।' यह शोध आनुवंशिकी की दुनिया में एक नए अध्याय का संकेत देता है।
न्यूक्लियल जिनोमिक्स के संस्थापक इसे 'निवारक दवा' (Preventive Medicine) का आधुनिक तरीका बताते हैं। लेकिन जब वे लंबाई और बुद्धिमत्ता के लिए 'ऑप्टिमाइज़' करने का ऑफर देते हैं, तो यह बीमारी की रोकथाम से कहीं ज्यादा है। यह तकनीक हमें एक ऐसे मोड़ पर ले आई है जहां हम विज्ञान की सुविधा और मानवता की नैतिक सीमाओं के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की जरूरत है।
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