Watch Video: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि चोरी के आरोप में कुछ युवकों को कथित तौर पर बिजली का करंट देकर सजा दी गई। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वीडियो का संज्ञान लिया गया है और आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में कानून का शासन है और किसी व्यक्ति को स्वयं सजा देने का अधिकार नहीं है।
क्या कहा प्रियांक कानूनगो ने?
प्रियांक कानूनगो ने अपने बयान में कहा कि भारत में न तो शरिया कानून चलेगा और न ही तालिबानी सोच के आधार पर किसी को सजा दी जा सकती है। उनका कहना है कि यदि किसी पर अपराध का आरोप है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है और कानून अपने तरीके से कार्रवाई करेगा।
वीडियो को लेकर क्या है दावा?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट में दावा किया गया है कि चोरी के आरोप में युवकों को कथित तौर पर करंट लगाकर प्रताड़ित किया गया। हालांकि वीडियो की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही घटना के सभी तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे।
मानवाधिकारों पर उठे सवाल
यदि वीडियो में किए जा रहे दावे सही पाए जाते हैं तो यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना जा सकता है। किसी भी आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के बिना सजा देना भारतीय कानून के खिलाफ है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय की भूमिका सर्वोपरि होती है।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
मामले के वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ गया है। लोगों की मांग है कि वीडियो की सत्यता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।