Vijaya Ekadashi ki Hindi Aarti Lyrics: ॐ जय एकादशी माता… विजया एकादशी के मौके पर हिंदी में पढ़ें संपूर्ण आरती

Vijaya Ekadashi Aarti in Hindi Text PDF: विजया एकादशी की आरती में भगवान विष्णु की पूजा का महत्व बताया गया है। ये आरती भक्ति, शक्ति और मुक्ति की प्राप्ति के लिए गाई जाती है। विभिन्न महीनों में आने वाली एकादशी के नाम और उनके लाभों का वर्णन किया गया है

Anuj Shrivastava
अपडेटेड13 Feb 2026, 07:08 PM IST
विजय एकादशी की हिंदी आरती
विजय एकादशी की हिंदी आरती

Vijaya Ekadashi Aarti in Hindi Text: विजया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और शुभ मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से जीवन में विजय, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं और श्रद्धा भाव से विजया एकादशी की आरती गाते हैं। आरती का पाठ करने से मन को शुद्धि, पापों से मुक्ति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। आइए पढ़ते हैं विजया एकादशी की संपूर्ण आरती

विजया एकादशी आरती (Vijaya Ekadashi Aarti)

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।

गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।

नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

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कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।

शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

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