भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह दिन 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने और भारत के एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनने की याद दिलाता है।
इस अवसर पर देशभर में भव्य परेड, सांस्कृतिक झांकियां और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गणतंत्र दिवस का सबसे महत्वपूर्ण क्षण राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का औपचारिक प्रदर्शन होता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 26 जनवरी को झंडा फहराया (Hoist) जाता है या खोला (Unfurl) जाता है? और इन दोनों में क्या अंतर है?
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज क्यों खोला जाता है?
गणतंत्र दिवस के दिन झंडा नीचे से ऊपर नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि पहले से खंभे के ऊपर बंधे झंडे को खोला जाता है, जिसे अनफर्लिंग कहा जाता है। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रगान और अन्य औपचारिक कार्यक्रम होते हैं।
झंडा खोलने की यह परंपरा इसलिए है क्योंकि भारत 1947 में ही स्वतंत्र हो चुका था। 1950 में जब संविधान लागू हुआ, तब भारत पहले से आज़ाद था। इसलिए 26 जनवरी को झंडा ऊपर चढ़ाने के बजाय उसे खोलना, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
झंडा फहराने और झंडा खोलने में क्या है अंतर?
झंडा फहराना (Flag Hoisting):
- झंडा खंभे के नीचे से ऊपर चढ़ाया जाता है
- यह स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रतीक है
- मुख्य रूप से स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर किया जाता है
झंडा खोलना (Flag Unfurling):
- झंडा पहले से खंभे के ऊपर लगा होता है
- उसे सिर्फ खोलकर फैलाया जाता है
- यह संविधान, लोकतंत्र और गणराज्य का प्रतीक है
- गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर किया जाता है
इसलिए जब गणतंत्र दिवस 2026 आए तो याद रखें किइस दिन तिरंगा फहराया नहीं, बल्कि खोला जाता है, ताकि भारत के संविधान और उसके गणराज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा को सम्मान दिया जा सके।