दिल्ली की दम घुटती हवा के बीच अदालतों और सरकार की कार्रवाई में BS-3, BS-4, BS-5 और BS-6 जैसे तकनीकी शब्द रोजमर्रा की बहस का हिस्सा बन गए हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए साफ कर दिया कि अब दिल्ली-एनसीआर में केवल BS-4 और नए वाहनों को ही राहत मिलेगी। इसका सीधा मतलब है कि BS-4 से पहले की गाड़ियों की राजधानी में एंट्री बैन होगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें सीज भी किया जा सकता है।
क्या है BS मानक, कैसे शुरू हुआ?
BS का फुल फॉर्म है भारत स्टेज। साल 2000 में गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Bharat Stage Emission Standards की शुरुआत की गई थी। इसे वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने लागू किया। ये मानक यूरोपीय उत्सर्जन नियमों पर आधारित हैं, जिन्हें यूरो-2, यूरो-3 जैसे नामों से जाना जाता है।
BS-1 और BS-2, प्रदूषण नियंत्रण की शुरुआती कोशिशें
भारत में पहला उत्सर्जन मानक BS-1 एक अप्रैल 2000 को लागू हुआ। इसके तहत कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन के सीमित उत्सर्जन की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 2001 से BS-2 लागू हुआ, जिसमें उत्सर्जन स्तर को और सख्त किया गया और ईंधन में सल्फर की मात्रा 500 पीपीएम तक सीमित कर दी गई। यह दौर प्रदूषण पर नियंत्रण की शुरुआती लेकिन अहम पहल माना जाता है।
BS-3 और BS-4, बढ़ते प्रदूषण के बीच सख्त नियम
2005 में BS-3 मानक लाया गया, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन पर कड़ी सीमाएं तय की गईं। इसके बाद अप्रैल 2017 में BS-4 लागू हुआ, जिसने पेट्रोल और डीजल दोनों तरह के वाहनों के लिए उत्सर्जन स्तर को काफी कम कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब BS-3 गाड़ियों पर सख्ती तय मानी जा रही है।
BS-6 और मौजूदा हालात, लाखों गाड़ियों पर पड़ेगा असर
अप्रैल 2020 से भारत में BS-6 मानक लागू है, जो अब तक का सबसे सख्त उत्सर्जन नियम है। कोर्ट के फैसले का असर एनसीआर की लाखों गाड़ियों पर पड़ेगा। गुरुग्राम में करीब डेढ़ लाख, नोएडा में 1.40 लाख और गाजियाबाद में 3.70 लाख से अधिक BS-3 वाहन हैं, जिनकी दिल्ली में एंट्री पर रोक रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब AQI 300 के पार बना हुआ है।