
अगर आप नए पेरेंट्स हैं, तो अब तक आप बेबी फॉर्मूला के बारे में जरूर जान चुके होंगे। कई नए पेरेंट्केस ब्रेस्टफीडिंग साथ-साथ या उसकी जगह बच्चों को दूध पिलाने के लिए इस तैयार किए गए दूध (बेबी फॉर्मूला) पर निर्भर रहते हैं। आमतौर पर वे भरोसेमंद और मशहूर ब्रांड ही चुनते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने लोकप्रिय बेबी फॉर्मूला प्रोडक्ट्स की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में नेस्ले के इन्फेंट न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स को दर्जनों देशों में वापस मंगाया गया। SMA ब्रांड के लगभग 80 बैच वापस लेने के बाद नेस्ले के सीईओ ने इस मामले पर वीडियो के जरिये माफी मांगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के कम से कम 53 देशों में नेस्ले के इन बेबी फॉर्मूला प्रोडक्ट्स को लेकर स्वास्थ्य चेतावनी जारी की गई है। इन प्रोडक्ट्स में सेर्यूलाइड (cereulide) नामक जहरीले तत्व के संभावित संदूषण की आशंका जताई गई है।
क्या ऐसे तरीके हैं जिनसे पेरेंट्स यह सुनिश्चित कर सकें कि बेबी फॉर्मूला सुरक्षित है? सच यह है कि खरीदने से पहले फॉर्मूला की पूरी तरह जांच करना आसान नहीं होता। ज्यादातर मामलों में पेरेंट्स को उस कंपनी पर भरोसा करना पड़ता है जो इसे बनाती है। इसलिए आमतौर पर सबसे सुरक्षित तरीका यही माना जाता है कि अच्छे नाम और भरोसे वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी का फॉर्मूला ही खरीदा जाए।
इस विषय पर डॉक्टर ऋतिका सिंघल जैन कुछ आसान सुझाव देती हैं, जिनसे आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके बच्चे का फॉर्मूला सुरक्षित है:
फॉर्मूला में नमी न जाने दें। कई लोग रिफ़िल पैक का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में इसे एयरटाइट डिब्बे में रखना जरूरी है। खुले या गत्ते के डिब्बे में रखने से नमी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर यह भी कहती हैं, “इन सब बातों के बावजूद, बच्चे के लिए सबसे अच्छा ब्रेस्टफीडिंग ही है। लोगों को पूरी तरह शिशु फॉर्मूला पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।” डॉक्टर ऋतिका सिंघल जैन ये भी कहती हैं कि फॉर्मूला बनाने से पहले मिल्क बोतल को अच्छे से साफ करना भी उतना ही जरूरी होता है। डॉक्टर ने कहा कि फॉर्मूला को आपको 15 से 20 दिन के बीच इस्तेमाल कर लेना है।
डॉक्टर ने बताया कि अगर आप बच्चे को ऊपर का दूध पिला रहे हैं तो इसके लिए ग्लास या फिर स्टील की बोतल का ही इस्तेमाल करें और फॉर्मूला बनाते समय हमेशा गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। आपको इस बात का ध्यान भी रखना है कि बोतल में पहले पानी और फिर फॉर्मूला को डालना है। पैकेट में फॉर्मूला बनाने की जो विधि लिखी है उसे सख्ती से फॉलो भी करना है, वरना इससे बच्चा बीमार भी हो सकता है।
अगर आपको शक है कि बेबी फॉर्मूला पीने के बाद आपका बच्चा बीमार हो गया है, तो कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे किसी भी असामान्य लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
अगर बच्चे को दस्त, उल्टी या मतली हो रही हो, या वह ठीक से दूध/खाना न पी पा रहा हो या उसे पचाने में दिक्कत हो रही हो तो ऐसी स्थिति में आपको उसे डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। कई बार बच्चे को पेट में मरोड़ भी हो सकती है, जो आमतौर पर ज्यादा रोने से दिखाई देती है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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