अगर गलती से टूट जाए आपका छठ पूजा का व्रत? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और परंपराएं

छठ पूजा एक महत्वपूर्ण पर्व है जो सूर्य देव और छठी मइया के प्रति भक्ति और अनुशासन को दर्शाता है। इस पर्व में 36 घंटे का निर्जला उपवास और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है।

Manali Rastogi
अपडेटेड27 Oct 2025, 11:00 AM IST
अगर गलती से टूट जाए आपका छठ पूजा का व्रत? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और परंपराएं
अगर गलती से टूट जाए आपका छठ पूजा का व्रत? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और परंपराएं

छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं है, यह सूर्य देव और छठी मइया के प्रति समर्पण, अनुशासन और अटूट आस्था का वादा है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।

इस व्रत का सबसे कठिन भाग होता है 36 घंटे का निर्जला उपवास, जिसमें भक्त बिना पानी के रहते हैं। यह उपवास त्याग, पवित्रता और आत्मसमर्पण का प्रतीक माना जाता है।

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लेकिन कई बार बीमारी, कमजोरी या किसी अनजाने कारण से यह व्रत टूट जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इससे देवी-देवता नाराज़ हो जाते हैं? और परंपरा के अनुसार इसका प्रायश्चित कैसे किया जाए? आइए जानते हैं शास्त्रों और लोक परंपराओं में क्या कहा गया है।

छठ पूजा का दिव्य उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि करना है। इस महापर्व में भक्त सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं, जिनके आशीर्वाद से परिवार में स्वास्थ्य, समृद्धि और सौहार्द बना रहता है। सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने और आत्मिक संतुलन पाने का यह एक साधन माना जाता है।

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36 घंटे का यह निर्जला व्रत, जो प्रायः महिलाएं करती हैं, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है। यह केवल सहनशीलता की परीक्षा नहीं, बल्कि मन की स्थिरता और श्रद्धा की भी कसौटी है।

अगर आपका निर्जला व्रत गलती से टूट जाए, तो घबराएं नहीं। धर्मशास्त्रों और लोकमान्यताओं में कहा गया है कि छठी मइया करुणामयी हैं, वे सच्चे मन से की गई भक्ति को ही स्वीकार करती हैं। अनजाने में हुई गलती के लिए दंड नहीं, बल्कि भक्ति भाव से प्रायश्चित (क्षमा याचना) करना चाहिए।

परंपरा के अनुसार, व्रत टूट जाने पर सबसे पहले स्नान करें और शरीर की शुद्धि करें। छठी मइया की प्रतिमा या तस्वीर के सामने एक दीपक जलाएं। शांत मन से मइया से क्षमा मांगें और कहें, “हे छठी मइया, मुझसे यह भूल अनजाने में हुई है, कृपया मुझे क्षमा करें और मेरा भक्ति भाव स्वीकार करें।”

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इसके बाद एक साधारण प्रार्थना करें या छठ मंत्र का जाप करें। बाद में किसी परिवार के बुजुर्ग या पुजारी से सलाह लेकर फल, वस्त्र या भोजन का दान करें। यह दान प्रायश्चित का प्रतीक माना जाता है। अगर आप चाहें, तो अगले दिन नया संकल्प लेकर व्रत दोबारा रख सकते हैं।

शास्त्रों में कहा गया है कि छठी मइया निष्ठा चाहती हैं, न कि पूर्णता। अगर आप सच्चे मन से फिर से व्रत रखने का संकल्प लेते हैं, तो यह आपकी भक्ति का प्रतीक है।

छठी मइया को करुणामयी माता माना गया है। जैसे एक मां अपने बच्चों की गलती को माफ कर देती है, वैसे ही छठी मइया भी अपने भक्तों की अनजानी भूलों को क्षमा कर देती हैं। इसलिए यदि आपका निर्जला व्रत टूट जाए, तो निराश न हों। सच्चे मन से क्षमा मांगें, दान करें और फिर से भक्ति के मार्ग पर लौट आएं। मइया की कृपा सूर्य की तरह है जो सच्चे भक्तों पर कभी कम नहीं होती।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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