कश्मीर घाटी में कड़ाके की ठंड का 40 दिनों का दौर, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चिल्ला ए कलां’ कहा जाता है, सोमवार को अच्छी शुरुआत के साथ शुरू हुआ। बीते 24 घंटों में ऊंचे इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश हुई, जिससे पिछले तीन महीनों से चला आ रहा सूखा दौर खत्म हो गया।
गुलमर्ग स्की रिज़ॉर्ट में पिछले 24 घंटों में करीब नौ इंच बर्फबारी हुई है, जिससे वहां चारों ओर सफेद चादर बिछ गई है। इस बर्फबारी का इंतज़ार स्की करने वालों, क्रिसमस और न्यू ईयर मनाने आए पर्यटकों और पर्यटन से जुड़े लोगों को लंबे समय से था। अगर आप भी बर्फबारी देखना चाहते हैं, तो चिल्ला ए कलां के दौरान कश्मीर की यात्रा ज़रूर करें।
चिल्ला ए कलां क्या है और यात्री इसे क्यों पसंद करते हैं?
चिल्ला ए कलां के दौरान कश्मीर घाटी में सबसे ज़्यादा ठंड और भारी बर्फबारी होती है। इस समय डल झील जैसे जलाशय जम जाते हैं। कई बार पानी की पाइपलाइन भी जम जाती है, जिससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होती है। हालांकि किसानों के लिए यह सख्त सर्दी अच्छी मानी जाती है, क्योंकि इससे आने वाले मौसम में फसल अच्छी होने की उम्मीद बढ़ जाती है।
चिल्ला ए कलां में होने वाली बर्फबारी पहाड़ों में मौजूद स्थायी जल स्रोतों को फिर से भर देती है। यही जल स्रोत गर्मियों में जम्मू-कश्मीर की नदियों, झीलों, झरनों और नालों को पानी देते हैं। इस दौरान लोग पारंपरिक ऊनी पोशाक ‘फेरन’ पहनते हैं, जो लंबा और गर्म कपड़ा होता है और कड़ाके की ठंड से बचाता है।
सोनमर्ग और पहलगाम में मौसम की पहली बर्फबारी
यात्री सोनमर्ग और पहलगाम की भी सैर कर सकते हैं, जहां बीते 24 घंटों में मौसम की पहली बर्फबारी हुई है। होटल मालिक, टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियां अगले दो-तीन दिनों में पर्यटकों के आने की उम्मीद कर रही हैं।
इसके अलावा, डॉक्टरों का मानना है कि बारिश और बर्फबारी से घाटी की हवा साफ होगी, जिससे सांस और छाती से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को राहत मिलेगी। ऐसे में यह समय सचमुच ‘धरती के स्वर्ग’ कश्मीर घूमने के लिए बिल्कुल सही है।