Flash Fog: दिल्ली की सर्द सुबहें अक्सर धुंध और ट्रैफिक जाम के साथ आती हैं। लेकिन 14 जनवरी 2026 की सुबह ने राजधानी को चौंका दिया। लोग जैसे ही रोजाना की ठंडी हवा और हल्की धुंध के लिए तैयार हुए, अचानक कुछ ही मिनटों में ऐसा कोहरा छा गया कि सामने कुछ भी दिखाई देना मुश्किल हो गया। हैरानी की बात ये रही कि जितनी तेजी से ये फॉग आया, उतनी ही तेजी से गायब भी हो गया।
अचानक आया फ्लैश फॉग
बुधवार सुबह करीब 7:45 से 8 बजे के बीच दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में अचानक बेहद घना कोहरा फैल गया। सड़कों पर चल रहे लोग और ड्राइवर समझ ही नहीं पाए कि सामने दिखना क्यों बंद हो गया। सामान्य तौर पर सर्दियों का कोहरा धीरे-धीरे रात में बनता है और सुबह तक बना रहता है। लेकिन फ्लैश फॉग बिल्कुल अलग तरह से काम करता है। यह अचानक बनता है, बहुत घना होता है और फिर उतनी ही तेजी से गायब भी हो जाता है।
क्या है ये फ्लैश फॉग?
फॉग यानी जमीन के पास बनने वाला बादल। आमतौर पर ये रातभर धीरे-धीरे बनता है जब तापमान गिरता है। लेकिन फ्लैश फॉग अलग नियमों पर चलता है। इसमें ठंडी हवा, नमी और हवा की दिशा में अचानक बदलाव मिलकर कुछ ही मिनटों में घना कोहरा बना देते हैं।
कैसे बना और गायब हुआ ये फ्लैश फॉग?
दिल्ली-एनसीआर में पहले से मौजूद नमी और प्रदूषण के कणों ने इस फॉग को और घना बना दिया। हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण पानी की बूंदों को पकड़ने लगे और फिर कुछ ही मिनटों में विजिबिलिटी लगभग शून्य। लेकिन फिर जैसे ही सूरज की रोशनी थोड़ी तेज हुई, जमीन का तापमान बढ़ा और हवा हल्की सी चली, इससे वो संतुलन टूट गया जिसने फॉग बनाया था। पानी की बूंदें फिर से वाष्प में बदल गईं और कोहरा अचानक गायब हो गया।
बिना चेतावनी वाला खतरा है ये
फ्लैश फॉग सबसे खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि यह बिना किसी अलर्ट के आता है। ड्राइवर, पैदल चलने वाले और यहां तक कि उड़ानों पर भी इसका असर अचानक पड़ सकता है। कुछ ही सेकंड में दृश्यता कम होना हादसों का खतरा बढ़ा देता है।
मौसम विभाग का कहना है कि सर्दी और कोल्ड वेव के चलते ऐसे छोटे लेकिन तीखे फॉग एपिसोड दोबारा हो सकते हैं। यानी दिल्ली वालों को सर्दियों में अब सिर्फ लंबी रातों वाली धुंध ही नहीं, बल्कि "फ्लैश फॉग" का भी सामना करना पड़ सकता है।