
मुहूर्त सिजेरियन (Muhurat Caesarean) वह प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे का जन्म डॉक्टर की सलाह या प्राकृतिक समय पर नहीं, बल्कि किसी शुभ समय या मुहूर्त के अनुसार कराया जाता है। आमतौर पर यह निर्णय परिवार के धार्मिक या ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित होता है, ताकि बच्चे का जन्म एक शुभ लग्न या सकारात्मक ग्रह स्थिति में हो। इस कारण इसे ‘मुहूर्त सिजेरियन’ कहा जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में मुहूर्त सिजेरियन का चलन तेजी से बढ़ा है। कई परिवार अब बच्चे के जन्म के लिए ज्योतिषियों की सलाह लेकर पहले से तय तारीख और समय पर सिजेरियन डिलीवरी करवाने लगे हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में यह ट्रेंड ज्यादा देखा जा रहा है, जहां माता-पिता बच्चे के भविष्य को लेकर अत्यधिक सजग रहते हैं और शुभ समय में जन्म को सौभाग्य से जोड़ते हैं।
मुहूर्त सिजेरियन वह स्थिति होती है जब बच्चे के जन्म के लिए सिजेरियन डिलीवरी (सी-सेक्शन) का समय किसी शुभ मुहूर्त या ज्योतिषीय समय देखकर तय किया जाता है। यानी डॉक्टर और परिवार आपसी सहमति से ऑपरेशन का समय इस आधार पर चुनते हैं कि उस समय ग्रह-नक्षत्र, तिथि और योग बच्चे के भविष्य के लिए शुभ हों। इसे आमतौर पर हिंदू संस्कृति में ज्योतिष या पंडित की सलाह से किया जाता है।
सामान्य तौर पर सिजेरियन तभी किया जाता है जब मां या बच्चे की सेहत को खतरा हो, या प्राकृतिक प्रसव (Normal Delivery) संभव न हो। लेकिन मुहूर्त सिजेरियन में ऑपरेशन पूरी तरह से योजना बनाकर किया जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में मुहूर्त सिजेरियन का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके पीछे कई कारण हैं:
ज्योतिष पर विश्वास: भारत में लोग मानते हैं कि ग्रह-नक्षत्र बच्चे के भविष्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए माता-पिता चाहते हैं कि बच्चा शुभ लग्न या नक्षत्र में जन्म ले, जिससे उसका जीवन सुखमय और सफल हो।
परिवार और समाज का दबाव: कई बार दादा-दादी या परिवार के बुजुर्ग शुभ समय का सुझाव देते हैं, जिससे माता-पिता को उस समय पर डिलीवरी करवाने का मन बनता है।
चिकित्सा में सुविधा: अब आधुनिक अस्पतालों और डॉक्टरों के पास इतना नियंत्रण है कि वे डिलीवरी की तारीख और समय तय कर सकते हैं। इससे माता-पिता को मानसिक शांति मिलती है कि सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से होगा।
सेलेब्रिटी और शहरी प्रभाव: शहरी इलाकों और सेलिब्रिटीज़ के बीच मुहूर्त सिजेरियन का ट्रेंड ज्यादा दिखता है। जब मशहूर लोग ऐसा करते हैं, तो आम लोग भी उसे अपनाने लगते हैं।
कभी-कभी डॉक्टर को बच्चे के तैयार होने से पहले ऑपरेशन करना पड़ता है, जिससे बच्चे को सांस लेने या वजन से जुड़ी समस्या हो सकती है।
हालांकि मुहूर्त सिजेरियन को लेकर भावनात्मक और सांस्कृतिक कारण समझे जा सकते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चे और मां की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है। किसी शुभ समय के चक्कर में प्राकृतिक प्रक्रिया या डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सही संतुलन यह है कि माता-पिता शुभ समय पर विचार करें, लेकिन अंतिम निर्णय स्वास्थ्य और चिकित्सीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही लें।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदारी नहीं है।)
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