Indian Rocket Force: चीन और पाकिस्तान के बाद अब भारत भी अपनी रॉकेट-मिसाइल फोर्स खड़ी करने का प्लान कर रहा है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को ऐलान किया कि भारतीय सेना 'रॉकेट-सह-प्रक्षेपास्त्र' बल गठित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर के खूनी सबकों से सीखते हुए ड्रोन-मिसाइलों का जबरदस्त जखीरा तैयार किया जा रहा है।
क्या होता है रॉकेट फोर्स?
रॉकेट फोर्स एक विशेष सैन्य इकाई होती है। इसमें लंबी दूरी की रॉकेटों, बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल होती है। ये पारंपरिक तोपखाने से कहीं आगे होती है, क्योंकि ये सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को कुछ ही मिनटों में निशाना बना सकती है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। चीन ने 2016 में इसे बनाया था। उसके बाद अब उनका रॉकेट फोर्स परमाणु हथियारों से लेकर पारंपरिक मिसाइलों तक से लैस है।
वहीं पाकिस्तान भी इस मामले में पीछे नहीं है। उसने अपनी आर्मी स्ट्रैटेजिक फोर्सेस से इसी तरह की क्षमता हासिल कर ली है। भारत के दोनों पड़ोसी देशों के पास पहले से ही ऐसी ताकत मौजूद है। यही वजह है कि भारतीय सेना अब सोच रही है कि उसे भी एक रॉकेट-सह-प्रक्षेपास्त्र बल बनाना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाए रखा जा सके।
चीन-पाकिस्तान से कितना खतरा?
चीन की पीएलएआरएफ एशिया की सबसे घातक ताकतों में शुमार है। लद्दाख और अरुणाचल सीमाओं पर तनाव के बीच ये बल भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं पाकिस्तान की रॉकेट फोर्स 'नास्र' जैसी टैक्टिकल न्यूक्लियर मिसाइलों से लैस है, जिससे वो कश्मीर और पंजाब की सीमाओं को निशाना बना सकता है।
भारत की ये पहल न केवल रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि पड़ोसियों को संदेश भी देगी कि अगर उनसे भारत पर बुरी नजर डाली, तो भारत चुप नहीं बैठेगा।