Basant Panchami 2026: क्या है सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त? जानिए पूजा विधि और महत्व

बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का पर्व है और यह विद्या व ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। यह पर्व 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड20 Jan 2026, 11:12 AM IST
Basant Panchami 2026: क्या है सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त? जानिए पूजा विधि और महत्व
Basant Panchami 2026: क्या है सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त? जानिए पूजा विधि और महत्व

बसंत पंचमी, जिसे वसंत पंचमी या श्री पंचमी भी कहा जाता है, भारत के सबसे रंगीन और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और हिंदू पंचांग के माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन नई शुरुआत, शिक्षा और रचनात्मकता का संदेश देता है।

बसंत पंचमी का महत्व

यह दिन मुख्य रूप से ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से अज्ञान दूर होता है और शिक्षा व रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता मिलती है। इसलिए छात्र, कलाकार, संगीतकार और विद्वान इस पर्व को विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

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बसंत पंचमी 2026: तिथि और समय

  • माघ शुक्ल पंचमी की शुरुआत: 23 जनवरी 2026, सुबह 2:28 बजे
  • माघ शुक्ल पंचमी की समाप्ति: 24 जनवरी 2026, सुबह 1:46 बजे

सरस्वती पूजा मुहूर्त

23 जनवरी, सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक

सरस्वती पूजा सामग्री

सरस्वती पूजा के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार है:

  • मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर
  • पीले रंग का कपड़ा और पीले फूल (गेंदा, गुलदाउदी)
  • फल जैसे केला और सेब
  • पारंपरिक मिठाइयां जैसे केसर भात और बूंदी लड्डू
  • अगरबत्ती, दीपक और घी
  • हल्दी, कुमकुम और चंदन
  • किताबें, कॉपियां और संगीत वाद्य यंत्र

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बसंत पंचमी 2026: तिथि और समय

  • माघ शुक्ल पंचमी की शुरुआत: 23 जनवरी 2026, सुबह 2:28 बजे
  • माघ शुक्ल पंचमी की समाप्ति: 24 जनवरी 2026, सुबह 1:46 बजे

सरस्वती पूजा मुहूर्त

23 जनवरी, सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक

सरस्वती पूजा सामग्री

सरस्वती पूजा के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार है:

  • मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर
  • पीले रंग का कपड़ा और पीले फूल (गेंदा, गुलदाउदी)
  • फल जैसे केला और सेब
  • पारंपरिक मिठाइयां जैसे केसर भात और बूंदी लड्डू
  • अगरबत्ती, दीपक और घी
  • हल्दी, कुमकुम और चंदन
  • किताबें, कॉपियां और संगीत वाद्य यंत्र

घर पर बसंत पंचमी कैसे मनाएं?

जो लोग घर पर सरस्वती पूजा करते हैं, वे सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनते हैं। ये रंग ऊर्जा, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं। घर को गेंदा फूलों से सजाया जाता है और चावल के आटे से अल्पना या रंगोली बनाई जाती है।

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छात्र अक्सर इस दिन हल्का उपवास रखते हैं और पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। पूजा के बाद प्रसाद के रूप में मिठाइयां और फल परिवार व पड़ोसियों में बांटे जाते हैं।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में परंपराएं

देश के विभिन्न क्षेत्रों में बसंत पंचमी अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है:

  • उत्तर भारत में पतंग उड़ाना इस दिन की खास परंपरा है
  • पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में घरों, स्कूलों और कॉलेजों में सरस्वती पूजा बड़े उत्साह से होती है
  • शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रार्थनाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं
  • केसरी हलवा और बूंदी लड्डू जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो त्योहार की रौनक बढ़ाते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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