What is Sindoor ka Paudha: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर ‘सिंदूर’ का पौधा लगाया। ये पौधा उन्हें गुजरात दौरे के दौरान कच्छ में 1971 की भारत-पाक लड़ाई में बहादुरी दिखाने वाली महिलाओं के एक समूह ने भेंट किया था। नाम सुनकर बहुत से लोगों को ये भ्रम हो सकता है कि क्या ये वही सिंदूर है जो महिलाओं की मांग में सजता है।
अब तक हम में से ज्यादातर लोग यही मानते आए हैं कि सिंदूर सिर्फ लैब में बनता है, यानी चूना, हल्दी और मरकरी मिलाकर तैयार किया गया मैन-मेड वर्मिलियन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुहागिनों की मांग में सजने वाला ये सुहाग का प्रतीक सिर्फ केमिकल से नहीं, बल्कि एक खास पौधे के बीजों से भी बनता है।
असल में, सिंदूर का पौधा एक खास किस्म का पेड़ होता है, जिसे अंग्रेजी में कुमकुम ट्री या कमील ट्री कहा जाता है। इसका बोटैनिकल नाम-बिक्सा ओरेलाना (Bixa orellana) है और इसे संस्कृत में 'सिंदूरी' के नाम से भी जाना जाता है। ये पेड़ दक्षिण अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में उगाया जाता है। भारत में भी ये महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में पाया जाता है।
कैसे बनता है पौधे से सिंदूर?
इस पौधे पर जो फल लगते हैं, वो शुरू में हरे और फिर पककर लाल हो जाते हैं। इन फलों के अंदर मौजूद छोटे-छोटे बीजों को पीसकर बिना किसी केमिकल के शुद्ध सिंदूर तैयार किया जाता है। इसे ही कहा जाता है हर्बल सिंदूर, जो स्किन फ्रेंडली भी होता है और किसी साइड इफेक्ट के बिना इस्तेमाल किया जा सकता है।
लिपस्टिक से लेकर नेल पॉलिश तक होते हैं तैयार
इसके बीजों को पीसकर न सिर्फ सिंदूर बल्कि लिपस्टिक जैसी कॉस्मेटिक चीजें भी बनाई जाती हैं। इनमें हर्बल लिपस्टिक, हेयर डाई, नेल पॉलिश, खाने में इस्तेमाल किया जाने वाला रंग, रेड इंक, दवाइयों में प्राकृतिक रंग का नाम शामिल है।
सिंदूर का पेड़ 20 से 25 फीट तक ऊंचा होता है, यानी लगभग एक नींबू के पेड़ जितना। एक पौधे से 1 से 1.5 किलो तक फल मिल सकते हैं, और इसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप हर्बल सिंदूर या पौधों से जुड़ी चीजों का सेवन या इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।