अक्सर देखा जाता है कि रेस्तरां में पीने का पानी मांगो तो वेटर बोतल थमा देता है। बोतल बंद पानी की कीमत भी अच्छी-खासी होती है। सवाल है कि इंसान खाना खाएगा तो पानी तो पिएगा ही। और, जब खाना रेस्तरां में खाएगा तो पानी कहीं और तो पीने जाएगा नहीं। तो पीने के पानी के लिए जबरन अलग से पैसे लेना कहां तक सही है? खाना खिलाने वाली जगहों के लिए पीने का पानी देने को लेकर कानूनी निर्देश क्या है, आइए जानते हैं।
खाना ऑर्डर किया तो पानी फ्री में मिलेगा?
रेस्तरां में खाना ऑर्डर करने पर फ्री ड्रिंकिंग वाटर मांगना किसी कन्ज्यूमर का अधिकार है या नहीं, यह जानने के लिए फरीदाबाद कन्ज्यूमर कोर्ट का एक फैसला बहुत सटीक है। पिछले वर्ष 5 दिसंबर, 2025 को कन्ज्यूमर कोर्ट ने हरियाणा के फरीदाबाद सेक्टर 85 के एक नामी रेस्तरां के खिलाफ एक ग्राहक की शिकायत पर फैसला दिया था।
फरीदाबाद के रेस्तरां ने नहीं दिया फ्री पीने का पानी
ग्राहक ने शिकायत की थी कि उन्होंने रेस्तरां में खाना ऑर्डर किया और वेटर से पीने का पानी मांगा। इस पर वेटर ने कहा कि मुफ्त में पीने का पानी नहीं मिलता है, उन्हें बोतल खरीदना होगा। ग्राहक ने पहले वेटर और फिर रेस्तरां के मैनेजर से कहा कि मुफ्त में पीने का पानी उनका अधिकार है, रेस्तरां पीने का पानी खरीदने को मजबूर नहीं कर सकता है। ग्राहक की सारी दलीलों को दरनिकार करते हुए रेस्तरां मैनेजर ने ग्राहक से कहा कि उन्हें जहां शिकायत करनी हो कर दें, लेकिन उन्हें फ्री ड्रिंकिंग वाटर नहीं मिलेगा। फिर ग्राहक ने 40 रुपये देकर पानी का बोतल खरीदा।
रेस्तरां तोड़े कानून तो कहां करें शिकायत, जानिए
तब जाकर ग्राहक ने कन्ज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने पानी का बिल कन्ज्यूमर कोर्ट को दिया। ग्राहक ने कोर्ट से उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और एफएसएसआई के रेस्तरां के लिए जारी गाइडलाइंस के आलोक में कहा कि रेस्तरां समेत खाने की किसी भी जगह पर मुफ्त पीने का पानी मांगना ग्राहकों का अधिकार है। उन्होंने दलील दी कि कानून साफ-साफ कहता है कि किसी भी ग्राहक से पीने के पानी के लिए बोतल खरीदने को मजबूर नहीं किया जा सकता है। चूंकि रेस्तरां ने यही किया और उनसे बोतल का पानी देकर 40 रुपये वसूले, इसलिए यह कानून का उल्लंघन है।
रेस्तरां में फ्री पानी नहीं देने पर कन्ज्यूमर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
ग्राहक की दलीलों को सही पाते हुए फरीदाबाद कन्ज्यूमर कोर्ट ने रेस्तरां को ग्राहक से वसूले गए 40 रुपये वापस करने के साथ-साथ 3,000 रुपये हर्जाना भरने का निर्देश दिया। रेस्तरां ने ग्राहक की शिकायत पर सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखना भी जरूरी नहीं समझा और उसने कोर्ट में कभी अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा। कोर्ट ने कहा कि चूंकि ग्राहक ने अपना मुकदमा खुद ही लड़ा, इसलिए उन्हें इसकी ज्यादा लागत नहीं आई। इसी को देखते हुए कोर्ट ने सिर्फ 3,000 रुपये का ही हर्जाना दिलाया।
अगर वाटर बोतल खरीदने पर मजबूर करे रेस्तरां तो क्या करें?
अगर आपके साथ भी ऐसा ही मामला पेश होता है तो रेस्तरां वालों से विवाद करने की जगह पैसे देकर पानी खरीद लीजिए और बिल जरूर लीजिए। उस बिल को लेकर कन्ज्यूमर कोर्ट जाइए। कोर्ट में आप अपना पक्ष खुद से भी रख सकते हैं, इसके लिए किसी वकील करने की भी जरूरत नहीं है। हालांकि, केस अगर पेचीदा हो तो आपको वकील की सेवा भी लेनी पड़ सकती है। कोर्ट ने अगर आपके पक्ष में फैसला दिया तो पूरी संभावनी होगी कि मुकदमा लड़ने पर आए खर्च के मुताबिक आपको हर्जाना भी दिलाया जाए।