युवाओं में पिछले कुछ समय से हार्ट अटैक के बढ़ते मामले देखने को मिल रहे हैं। सामने आई कई रिपोर्ट्स में ये बताया गया है कि अधिकांश भारतीयों की मृत्यु हार्ट अटैक की वजह से हुई है। हालांकि, हार्ट अटैक से होने वाले भारतीयों का रेट अभी भी पश्चिमी देशों के मुकाबले कम है। इसी क्रम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ जीवितेश सतीजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके ये बताया है कि अगर आपके सामने किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ रहा हो तो ऐसी स्थिति में सबसे पहले क्या करना चाहिए।
डॉ जीवितेश सतीजा ने अपने पोस्ट में बताते हैं कि हर मिनट 4 भारतीयों की जान हार्ट अटैक से जाती है। ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं होता कि उन्हें मदद नहीं मिली, बल्कि इस कारण से होता है क्योंकि उस पीड़ित के आसपास मौजूद लोगों को पता नहीं था कि क्या करना है। उन्होंने कहा कि पहले कुछ मिनटों में लिया गया सही कदम ज़िंदगी और मौत के बीच फर्क कर सकता है। अपनी बात को जारी रखते हुए डॉ जीवितेश सतीजा ने कहा कि अंदाजा मत लगाइए, लक्षण पहचानिए। CPR सीखिए, तैयार रहिए।
हार्ट अटैक क्या होता है?
हार्ट अटैक, जिसे दिल का दौरा भी कहा जाता है, तब होता है जब दिल को खून पहुंचाने वाली नस में अचानक रुकावट आ जाती है। इस रुकावट की वजह से दिल के किसी हिस्से तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाते।
अधिकतर मामलों में यह रुकावट नसों में जमी चर्बी की परत के फटने और उस पर खून का थक्का बनने से होती है। दिल के दौरे में होने वाला दर्द आमतौर पर तेज़ चुभन जैसा नहीं, बल्कि सीने में भारीपन, जकड़न या दबाव जैसा महसूस होता है। भारत में दिल का पहला दौरा पश्चिमी देशों की तुलना में औसतन लगभग दस साल पहले हो रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
स्टेप 1: चेतावनी के संकेत पहचानें
दिल के दौरे का सबसे आम लक्षण सीने के बीचों-बीच दर्द या भारीपन है, जो पांच मिनट से अधिक समय तक रह सकता है। यह दर्द बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ तक भी फैल सकता है। इसके साथ पसीना आना, जी मिचलाना, साँस फूलना, चक्कर आना और घबराहट जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
कुछ बुजुर्गों, मधुमेह के मरीजों और कुछ महिलाओं में दिल का दौरा बिना तेज दर्द के भी हो सकता है। ऐसे मामलों में केवल अत्यधिक थकान, कमजोरी या गैस जैसी बेचैनी महसूस हो सकती है।
यदि लक्षण अचानक नए हों, पहले से अधिक बढ़ रहे हों या मेहनत करने पर बढ़ते हों, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत कार्रवाई करें। शक की स्थिति में यह तय करने का काम डॉक्टर पर छोड़ दें कि दिल का दौरा है या नहीं।
स्टेप 2: तुरंत मदद लें और अस्पताल पहुंचें
जैसे ही दिल के दौरे का शक हो, तुरंत इमरजेंसी सेवा के लिए फोन करें और स्पष्ट रूप से बताएं कि दिल के दौरे की आशंका है। ऐसी एम्बुलेंस की मांग करें जो सीधे ऐसे अस्पताल ले जा सके जहां दिल की बंद नस को तुरंत खोलने की सुविधा उपलब्ध हो।
यदि बहुत पास में ऐसा अस्पताल है और कुछ ही मिनटों में पहुंचा जा सकता है, तो सीधे वहीं जाने पर विचार करें। इस समय छोटे क्लीनिकों में समय न गंवाएं। अगर एम्बुलेंस आने में बहुत देरी हो रही हो, तो किसी निजी वाहन की व्यवस्था करें, लेकिन मरीज खुद वाहन न चलाए। अस्पताल पहुंचने में हर आधे घंटे की देरी से जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
स्टेप 3: खून पतला करने वाली गोली दें
मदद के लिए फोन करने के बाद या अस्पताल जाते समय मरीज को खून को पतला करने वाली एक गोली चबाकर दी जा सकती है, ताकि खून का थक्का और न बढ़े। इस गोली को निगलने के बजाय चबाना ज़रूरी है, ताकि इसका असर जल्दी हो। यदि मरीज को इस दवा से एलर्जी हो या पहले पेट में खून बहने की समस्या रही हो, तो यह गोली न दें। याद रखें, यह केवल शुरुआती मदद है, अस्पताल के इलाज का विकल्प नहीं।
स्टेप 4: मरीज को आराम की स्थिति में रखें
मरीज को बैठी हुई या लगभग पैंतालीस डिग्री झुकी हुई स्थिति में लिटाएं, बिल्कुल सीधा न लिटाएं। ताज़ी हवा का इंतज़ाम करें और तंग कपड़े ढीले कर दें। मरीज को शांत रखने की कोशिश करें, क्योंकि घबराहट से दिल पर और ज़ोर पड़ता है।
उसे चलने, सीढ़ियां चढ़ने या अनावश्यक हिलने-डुलने न दें। यदि डॉक्टर ने पहले से जीभ के नीचे रखने वाली दिल की दवा लेने की सलाह दी हो और रक्तचाप ठीक हो, तो मदद के इंतज़ार में वह दवा ली जा सकती है।
स्टेप 5: सांस और प्रतिक्रिया पर नजर रखें
मरीज की हालत पर लगातार ध्यान दें। देखें कि वह बोल पा रहा है या नहीं और उसकी सांस ठीक से चल रही है या नहीं। यदि वह अचानक बेहोश हो जाए, सांस लेना बंद कर दे या नाड़ी न मिले, तो यह दिल के रुक जाने की स्थिति हो सकती है।
ऐसे मामलों में समय बिल्कुल न गवाएं और तुरंत जीवन रक्षक दबाव देकर सांस चलाने की प्रक्रिया शुरू करें, जब तक कि चिकित्सा सहायता न पहुंच जाए। सही समय पर की गई यह कोशिश किसी की जान बचा सकती है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)