चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म में बहुत खास मानी जाती है। साल में 12 या 13 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन यह पूर्णिमा खास इसलिए होती है क्योंकि इसे भगवान हनुमान के जन्म से जोड़ा जाता है। इसी कारण इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान हनुमान की पूजा करते हैं। नदियों, झीलों या पवित्र जल में स्नान करना और दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
चैत्र पूर्णिमा 2026 कब है?
- चैत्र पूर्णिमा गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
- चंद्रमा उदय (Moonrise): शाम 7:07 बजे
- पूजा का शुभ समय: शाम 6:39 बजे से 8:06 बजे तक
चैत्र पूर्णिमा पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें (अगर संभव हो तो पवित्र नदी या जल में)
- स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें
- भगवान सत्यनारायण की विधि-विधान से पूजा करें
- शाम को चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य दें
- पूजा के बाद कच्चे अनाज से भरा हुआ घड़ा किसी जरूरतमंद को दान करें
क्या करें और क्या न करें?
- चैत्र पूर्णिमा के दिन सादगी और संयम रखना जरूरी माना जाता है।
- हल्का भोजन करें और ज्यादा व्यस्त या भारी काम न करें
- अपनी वाणी और व्यवहार पर ध्यान दें, किसी से झगड़ा न करें
- दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं
- ज्यादा से ज्यादा समय पूजा-पाठ में बिताएं
चैत्र पूर्णिमा का महत्व
मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने ब्रज में रास उत्सव किया था। साथ ही, यह भी माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म चैत्र महीने की पूर्णिमा को हुआ था, इसलिए उत्तर और मध्य भारत में इसी दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। हालांकि, कुछ जगहों पर हनुमान जयंती कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)