
शाबान के बाद रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है। इस पवित्र महीने में मुस्लिम रोज़ा रखते हैं और अधिक समय इबादत व अल्लाह की बंदगी में बिताते हैं। हर मुस्लिम इस महीने का बेसब्री से इंतजार करता है। रमजान के खत्म होने के अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है, जो मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। रमजान में रोजा रखना हर सक्षम मुस्लिम के लिए फर्ज (अनिवार्य) माना जाता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में रमजान कब शुरू हो सकता है।
रमजान की शुरुआत शाबान महीने की 29वीं तारीख को चांद देखने पर निर्भर करती है। अगर इस दिन चांद दिख जाता है, तो अगले दिन से रमजान का पहला रोज़ा रखा जाता है। अगर चांद न दिखे, तो रमजान एक दिन बाद शुरू होता है।
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, सऊदी अरब और खाड़ी देशों में 2026 में रमजान का पहला रोज़ा 18 फरवरी को हो सकता है। वहीं भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रमजान की शुरुआत 19 फरवरी से होने की संभावना है।
ईद-उल-फितर की तारीख भी चांद देखने पर निर्भर करती है। अगर रमजान की 29वीं शाम को शव्वाल का चांद दिखाई देता है, तो अगले दिन ईद मनाई जाती है। अगर चांद नहीं दिखता, तो ईद एक दिन बाद होती है। साल 2026 में ईद-उल-फितर 21 मार्च को मनाए जाने की उम्मीद है।
इस्लाम में रमजान को बेहद पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी महीने पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ का अवतरण हुआ था। इस्लामी मान्यता के अनुसार, 610 ईस्वी में रमजान की एक रात अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रील के ज़रिए पैगंबर मोहम्मद साहब पर कुरान की पहली आयतें नाज़िल की थीं।
रमजान को “नेकी का मौसम” भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस महीने में किया गया एक नफ़्ल (स्वेच्छा से किया गया) अमल, फ़र्ज़ के बराबर सवाब देता है, और फर्ज़ अमल का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। यह भी कहा जाता है कि रमजान शुरू होते ही जन्नत के दरवाज़े खुल जाते हैं।
रमजान का रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आंखों, कानों, ज़ुबान और मन को बुराई से बचाने का भी अभ्यास है। इस महीने में धैर्य, संयम और आत्मसंयम पर विशेष जोर दिया जाता है। रमजान में जकात (दान) देने का भी खास महत्व है। माना जाता है कि इस महीने में दी गई जकात और सदक़ा का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद बढ़-चढ़कर करते हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
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